रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: ‘गुरुदेव’ की कृतियों पर बनी ये फिल्में जरूर देखिए
1/7रवीेंद्रनाथ टैगोर की रचनाओं पर कई हिंदी फिल्में बनीं
रवीेंद्रनाथ टैगोर की रचनाओं पर कई हिंदी फिल्में बनीं
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महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को एक बांग्ला परिवार में हुआ था। गुरुदेव के नाम से मशहूर टैगोर बचपन से कविताएं और कहानियां लिखा करते थे। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। जहां तक फिल्मों की बात है तो टैगोर की कृतियों पर कई फिल्में बनीं। टैगोर की एक कृति नौका डूबी पर फिल्म ‘मिलन’ बनी और इसे भी लोगों ने सराहा। टैगोर की कृतियों का ही कमाल रहा कि उनके किरदारों से लोगों को प्यार हो जाता।
2/7लेकिन फिल्म को भी सराहना
लेकिन फिल्म को भी सराहना
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टैगोर की एक कृति को उठाकर गुलजार ने बहुत सुंदर तरीके से उसे फिल्म के रूप में पिरोया। लेकिन फिल्म को लोगों ने बहुत पसंद किया।
3/7काबुलीवाला फिल्म रही खूब चर्चा में
काबुलीवाला फिल्म रही खूब चर्चा में
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टैगोर की इस कृति पर अलग-अलग कई फिल्में बनीं। फिल्म के रूप में काबुलीवाला को बहुत पहचान मिली। इसकी कहानी ही ऐसी है कि सभी लोग इससे जुड़ जाते हैं।
4/7डाकघर को भी खूब प्यार
डाकघर को भी खूब प्यार
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टैगोर की कृति पर बनी फिल्म डाकघर की भी खूब चर्चा होती है। इसमें भी गांव का वह परिवेश आज भी सबको आकर्षित करता है।
5/7बायोस्कोपवाला
बायोस्कोपवाला
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काबुलीवाला कृति पर ही यह फिल्म बनी और इसे भी उसी तरह का प्यार दर्शकों का मिला।
6/7उपहार की भी रही चर्चा
उपहार की भी रही चर्चा
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उपहार को भी लोगों ने खूब पसंद किया। सुधेंदु रॉय ने यह फिल्म बनाई और इसे खासकर हिंदी पट्टी में लोगों ने बहुत प्यार दिया।
7/7कश्मकश
कश्मकश
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रितूपर्णो घोष ने यह फिल्म टैगोर की कृति पर बनाई और यह फिल्म खासकर पश्चिम बंगाल में काफी चली।

