6.7 के भूकंप से फिर कांपी धरती, बढ़ रहे हैं बड़े झटके

6.7 के भूकंप से फिर कांपी धरती, बढ़ रहे हैं बड़े झटके

पेरू में 6.7 तीव्रता के भूकंप के बाद एक बार फिर दुनिया में लगातार आ रहे बड़े भूकंपीय झटकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में इंडोनेशिया और कोलंबिया समेत अलग-अलग हिस्सों में 7 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन घटनाओं के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध है या धरती के अलग-अलग हिस्सों में सामान्य टेक्टोनिक गतिविधि ही इसकी वजह है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कम समय में अलग-अलग देशों में बड़े भूकंप आने का मतलब यह नहीं है कि सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। भूकंप का मुख्य कारण टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है और दुनिया के कुछ हिस्सों में प्लेटों की गतिविधि अधिक होने के कारण वहां भूकंप का खतरा भी ज्यादा रहता है।

पेरू में आते हैं बड़े भूकंप

पेरू पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के क्षेत्र में स्थित है। यह दुनिया के सबसे अधिक भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधि वाले क्षेत्रों में शामिल है। इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े भूकंपों का बड़ा हिस्सा दर्ज होता है। पेरू के पश्चिमी तट के पास नाजका प्लेट, साउथ अमेरिकन प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहा जाता है। प्लेटों की लगातार हलचल के कारण चट्टानों और फॉल्ट के बीच तनाव जमा होता रहता है। जब यह तनाव अचानक रिलीज होता है, तो तेज भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और भूकंप महसूस किया जाता है।

 एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर कर सकता है

कुछ परिस्थितियों में बड़े भूकंप की भूकंपीय तरंगें दूसरे क्षेत्रों में मौजूद पहले से तनावग्रस्त फॉल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को डायनैमिक ट्रिगरिंग कहते हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि पेरू में आया भूकंप इंडोनेशिया या कोलंबिया में आए बड़े भूकंप का कारण बना। बहुत दूर स्थित क्षेत्रों में ऐसी हलचल का प्रभाव सीमित हो सकता है और इसे बड़े भूकंपों की सीधी वजह मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

 पूरी दुनिया में भूकंप बढ़ गए हैं

ऐसा निष्कर्ष निकालना फिलहाल सही नहीं होगा। पृथ्वी पर हर दिन हजारों छोटे भूकंप आते हैं, जिनमें से अधिकांश इतने हल्के होते हैं कि लोगों को उनका पता तक नहीं चलता। जब थोड़े समय के भीतर कई बड़े भूकंप अलग-अलग देशों में आते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से ज्यादा चर्चा में आ जाते हैं। इससे ऐसा लग सकता है कि भूकंप की गतिविधि अचानक बहुत बढ़ गई है, जबकि अलग-अलग घटनाएं अपने-अपने स्थानीय टेक्टोनिक सिस्टम से जुड़ी हो सकती हैं।

भूकंप की भविष्यवाणी मुश्किल

वर्तमान वैज्ञानिक तकनीक से भूकंप के सटीक समय, स्थान और तीव्रता की पहले से भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। वैज्ञानिक सक्रिय फॉल्ट, प्लेटों की गति और भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करके जोखिम का आकलन जरूर करते हैं। इसलिए पेरू का 6.7 तीव्रता वाला भूकंप अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरी दुनिया में अचानक भूकंप बढ़ गए हैं। फिलहाल इसे पेरू के आसपास सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि के संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।

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