105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट से राहत

105 साल के कैदी को सुप्रीम कोर्ट से राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 105 साल के एक बुजुर्ग कैदी को बड़ी राहत देते हुए उसकी समयपूर्व रिहाई का आदेश दिया है। यह कैदी वर्ष 1994 के हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था और करीब तीन दशक से जेल में बंद था। उम्र और लंबे समय तक कारावास में रहने को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने अंतरिम रिहाई को स्थायी समयपूर्व रिहाई में बदलने का निर्देश दिया। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। अदालत के सामने कैदी की बेहद अधिक उम्र और लंबे समय से जेल में रहने का तथ्य प्रमुख रहा।

1994 के हत्या मामले में मिली थी उम्रकैद

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग कैदी रसिक चंद्र मंडल को 1994 के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वह लंबे समय तक जेल में रहा।

साल 2020 में उसकी ओर से अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था। इसके बाद 2024 में उसे पैरोल भी मिली। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम रिहाई को समयपूर्व रिहाई में बदलने का आदेश दिया है।

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30 साल से ज्यादा जेल में रहने का असर

इस मामले में सबसे उल्लेखनीय पहलू कैदी की उम्र है। करीब 105 वर्ष की उम्र में भी वह अपने मामले को लेकर वकीलों को निर्देश देने की स्थिति में बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तथ्य पर गौर किया कि इतनी अधिक उम्र और लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद वह अपने कानूनी मामले को लेकर सक्रिय है।

उम्र को देखते हुए मिली बड़ी राहत

अदालत के आदेश के बाद अब बुजुर्ग कैदी को जेल से बाहर रहने की अनुमति मिलेगी। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद मिली यह राहत उसके जीवन के अंतिम पड़ाव में परिवार के साथ समय बिताने का अवसर दे सकती है।

यह फैसला इस बात को भी सामने लाता है कि किसी कैदी की सजा पर विचार करते समय उसकी उम्र, कारावास की अवधि और मानवीय परिस्थितियों जैसे पहलुओं को भी अदालतें ध्यान में रख सकती हैं।

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