नई दिल्ली। अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो गया है, तो उसे जल्द से जल्द रिन्यू करा लें। सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ (No Insurance, No Fuel) व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत जिन वाहनों का वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से रोकने की योजना है।
देशभर में बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे वाहनों पर लगाम लगाने के लिए सरकार और बीमा नियामक IRDAI इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके तहत पेट्रोल पंपों को वाहनों के बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जिससे फ्यूल भरवाने पहुंचे वाहन के इंश्योरेंस की स्थिति की जांच की जा सकेगी।
पेट्रोल पंप पर ANPR कैमरे करेंगे नंबर प्लेट स्कैन
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए पंप पर पहुंचेगा, कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा।
इसके बाद सिस्टम वाहन के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की स्थिति की जांच करेगा। अगर वाहन का इंश्योरेंस एक्टिव यानी वैध नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप का सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से फ्यूल डिस्पेंसिंग रोक देगा।
यह भी पढ़े: रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ के अमेरिकी बिल की जानकारी
दिल्ली से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद IRDAI दिल्ली समेत कुछ प्रमुख शहरों में इस व्यवस्था का ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। दिए गए स्रोत के अनुसार, बड़ी संख्या में वाहन मालिक समय पर अपना इंश्योरेंस रिन्यू नहीं कराते हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान करना और बीमा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
नई गाड़ियों के इंश्योरेंस नियमों में बदलाव
नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि में भी बदलाव किया गया है।
- नई कार: 3 साल के बजाय 4 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस।
- नई बाइक और स्कूटी: 5 साल के बजाय 6 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस।
सड़क हादसों के पीड़ितों को मिल सकती है राहत
बिना बीमा वाली गाड़ियों से हादसा होने पर पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजे के लिए कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। बीमा नियमों को सख्ती से लागू करने का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवरेज सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के जरिए बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान आसान हो सकती है। इससे वाहन मालिकों को समय पर अपना बीमा रिन्यू कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम कलेक्शन पर असर
‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू होने पर अधिक वाहन मालिकों को अपना मोटर इंश्योरेंस रिन्यू कराना पड़ सकता है। इसका असर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम कलेक्शन पर भी पड़ सकता है।
दिए गए स्रोत के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में देश की टॉप-5 मोटर इंश्योरेंस कंपनियों ने मोटर प्रीमियम के रूप में करीब ₹48,400 करोड़ जुटाए थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में प्रीमियम कलेक्शन बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल इस व्यवस्था की शुरुआत दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करने की तैयारी है। ट्रायल के अनुभव के आधार पर आगे इसके विस्तार को लेकर फैसला किया जा सकता है।
