छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी मामले में आयकर विभाग ने भिलाई में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की बेनामी संपत्ति यूनिट (BPU) ने कोहका स्थित सूर्या रेसीडेंसी के मकान नंबर A-1 का भौतिक कब्जा अपने हाथ में लेकर उसे सील कर दिया है।
रिकॉर्ड के मुताबिक, यह संपत्ति खसरा नंबर 2028/38 पर बनी है और इसका क्षेत्रफल 0.02 हेक्टेयर है। यह मकान मनीष उपाध्याय के नाम पर दर्ज था, जिन्हें जांच में सूर्यकांत तिवारी के करीबी के तौर पर बताया गया है।
बेनामी संपत्ति के तौर पर चिन्हित किया गया था मकान
आयकर विभाग की जांच के दौरान इस संपत्ति को कथित तौर पर बेनामी संपत्ति के रूप में चिन्हित किया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग की टीम ने सुपेला पुलिस की मौजूदगी में मकान का कब्जा लिया और उसे सील कर दिया।
कार्रवाई के बाद मौके पर विभाग की ओर से एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। इससे संपत्ति पर विभागीय कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई।
ढोल बजाकर कराई गई मुनादी
संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई के दौरान आयकर विभाग की टीम ने स्थानीय स्तर पर मुनादी भी कराई। इसके लिए ढोल बजाकर आसपास के लोगों को कार्रवाई की जानकारी दी गई।
विभाग की ओर से यह कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया, ताकि संपत्ति के संबंध में की गई कार्रवाई की सार्वजनिक सूचना दी जा सके।
डायरी में कोड और लेन-देन की एंट्री का जिक्र
जांच एजेंसियों से जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड में मनीष उपाध्याय के इसी मकान में रहने का उल्लेख किया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार, यह मकान कथित तौर पर सूर्यकांत तिवारी की ओर से उपलब्ध कराया गया था।
जांच के दौरान जब्त की गई एक डायरी में मनीष उपाध्याय के नाम से जुड़े कुछ कोड और पैसों के लेन-देन की एंट्री मिलने का भी जिक्र है। एजेंसियों के अनुसार, जांच में सामने आए इन तथ्यों और बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत संपत्ति पर कार्रवाई की गई।
A-22 मकान पर भी लगाया गया नोटिस
सूर्या रेसीडेंसी के A-22 मकान पर भी आयकर विभाग के बेनामी संपत्ति प्रभाग ने कानूनी नोटिस चस्पा किया है। यह मकान पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और उनके परिजनों के नाम से जुड़ा बताया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस परिसर का इस्तेमाल कथित तौर पर कोयला लेवी से जुड़े पैसों के हिसाब-किताब और लेन-देन के समन्वय के लिए किया जाता था। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज दावे हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होंगे।
