अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक अलग तस्वीर सामने आई है। विकासखंड बलरामपुर के बरदबंधा गांव में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला में फिलहाल एक भी छात्र नहीं है, लेकिन दो शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल का अपना भवन भी नहीं है, जिसके कारण विद्यालय की स्थिति लंबे समय से बदहाल बनी हुई है।
पिछले सत्र में इस स्कूल में केवल तीन बच्चे पढ़ रहे थे। इनमें कक्षा पहली के दो और कक्षा दूसरी का एक छात्र शामिल था। स्कूल की अव्यवस्था के बीच इन बच्चों के अभिभावकों ने इस सत्र में उनका दाखिला दूसरे स्कूल में करा दिया। इसके बाद अब स्कूल में एक भी विद्यार्थी नहीं बचा है।
3-4 साल पहले जर्जर भवन तोड़ा गया
बरदबंधा की शासकीय प्राथमिक शाला का पुराना भवन करीब 3-4 साल पहले जर्जर होने के कारण तोड़ दिया गया था। इसके बाद नए भवन के निर्माण के लिए वर्ष 2022 में करीब 11 लाख रुपये की मंजूरी दी गई थी।
ग्रामीणों के मुताबिक, भवन निर्माण के लिए सामग्री भी गांव तक पहुंची थी, लेकिन बाद में उसे वहां से हटा लिया गया। इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा और आज तक नए भवन की नींव तक नहीं रखी जा सकी।
किचन शेड में लगती थी बच्चों की कक्षा
स्कूल भवन नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई मिड-डे मील तैयार करने वाले किचन शेड में कराई जाती थी। इसी छोटे से कमरे में भोजन तैयार करने के साथ बच्चों की कक्षाएं भी संचालित होती थीं।
पिछले सत्र में तीन बच्चे किसी तरह इसी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन इस सत्र में उन्होंने भी दूसरे स्कूल में दाखिला ले लिया। अगस्त तक शिक्षक नए बच्चों के प्रवेश का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई नया छात्र स्कूल में दाखिल नहीं हुआ।
दो शिक्षक पदस्थ, एक लंबे समय से अनुपस्थित
विद्यालय में एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक समेत कुल दो शिक्षक पदस्थ हैं। ग्रामीणों ने एक शिक्षक के लंबे समय से स्कूल नहीं आने का आरोप लगाया है।
इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजू कनौजिया ने बताया कि संबंधित शिक्षक कैंसर से पीड़ित हैं और इसी वजह से लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्कूल भवन के लिए वर्ष 2022 में राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
प्रधान पाठक को दूसरे स्कूल में अटैच करने की तैयारी
बीईओ के मुताबिक, अब बरदबंधा के प्रधान पाठक को प्राथमिक शाला धनेशपुर में अटैच किया जाएगा। आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
बरदबंधा का यह स्कूल फिलहाल ऐसी स्थिति में है, जहां न भवन है, न विद्यार्थी और फिर भी शिक्षकों की पदस्थापना बनी हुई है। भवन निर्माण में देरी और लगातार घटती छात्र संख्या ने गांव की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
