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पेनकिलर्स के ज्यादा इस्तेमाल से किडनी को नुकसान का खतरा

पेनकिलर्स के अधिक इस्तेमाल और किडनी डैमेज को दर्शाती तस्वीर पेनकिलर्स के अधिक इस्तेमाल और किडनी डैमेज को दर्शाती तस्वीर

बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और दवाओं के गलत या लंबे समय तक इस्तेमाल का असर किडनी की सेहत पर पड़ सकता है। खासतौर पर कुछ पेनकिलर्स का नियमित इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अमेरिकी स्वास्थ्य संस्थान NIDDK के अनुसार, NSAIDs जैसे इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सेन किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में Acute Kidney Injury का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

किडनी की बीमारी की शुरुआती अवस्था में कई बार स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास रखने वाले लोगों में किडनी रोग का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों के लिए नियमित मेडिकल जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।

लंबे समय तक पेनकिलर लेने से बचे

सिरदर्द, शरीर में दर्द, बुखार या अन्य तकलीफों में लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के OTC पेनकिलर्स ले लेते हैं। लेकिन NSAIDs का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। डिहाइड्रेशन या पहले से किडनी की बीमारी होने पर यह जोखिम और महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसलिए नियमित रूप से पेनकिलर लेने वाले लोगों को डॉक्टर या फार्मासिस्ट से यह जरूर पूछना चाहिए कि संबंधित दवा किडनी पर किस तरह असर डाल सकती है।

डायबिटीज और किडनी की सेहत

अनियंत्रित डायबिटीज किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। NIDDK के अनुसार डायबिटीज और अन्य जोखिम कारकों वाले लोगों में किडनी की जांच कराना महत्वपूर्ण है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं।

समय पर बीमारी का पता चलने से किडनी की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए उपचार और लाइफस्टाइल में बदलाव किए जा सकते हैं।

किडनी रोग में प्रोटीन इतना लें

किडनी की बीमारी सामने आने के बाद डाइट में प्रोटीन की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी जरूरी होती है। हालांकि, हर मरीज को एक जैसी लो-प्रोटीन डाइट की जरूरत नहीं होती। NIDDK के अनुसार कुछ CKD मरीजों में प्रोटीन की मात्रा को सीमित या मध्यम स्तर पर रखने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन बहुत कम प्रोटीन लेने से कुपोषण का खतरा भी हो सकता है। इसलिए प्रोटीन की सही मात्रा डॉक्टर या किडनी-डाइट में विशेषज्ञ डायटिशियन से तय करानी चाहिए।

कुछ मरीजों के लिए डॉक्टर मांस और डेयरी जैसे पशु-आधारित प्रोटीन को सीमित करने और जरूरत के अनुसार प्लांट-बेस्ड प्रोटीन को डाइट में शामिल करने की सलाह दे सकते हैं। यह सलाह मरीज की किडनी की स्थिति, अन्य बीमारियों और लैब रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड से भी सावधानी

किडनी रोग में सिर्फ प्रोटीन ही नहीं, बल्कि सोडियम यानी नमक की मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है। अधिक सोडियम शरीर में पानी रोक सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर और सूजन की समस्या बढ़ सकती है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसलिए पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक नमक वाले स्नैक्स और जरूरत से ज्यादा जंक फूड का सेवन सीमित करना उपयोगी हो सकता है।

किडनी को सुरक्षित रखने के लिए ये करें

  • बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक पेनकिलर न लें।
  • अगर पहले से किडनी की बीमारी है तो NSAIDs के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
  • किडनी की बीमारी होने पर प्रोटीन की मात्रा खुद से कम न करें।
  • डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटिशियन से व्यक्तिगत डाइट प्लान बनवाएं।
  • नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें।

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