NASA के Curiosity रोवर ने मंगल ग्रह की रहस्यमयी चट्टानों का एक शानदार पैनोरमा कैप्चर किया है। इन चट्टानों को ‘यार्डैंग’ कहा जाता है, जो लंबे समय तक चलने वाली हवा के कटाव से आकार लेती हैं। वैज्ञानिक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि मंगल पर इन अनोखी संरचनाओं का निर्माण कैसे हुआ। मिशन टीम की योजना 2027 में इन चट्टानों के निचले हिस्से तक पहुंचकर उनकी विस्तृत जांच करने की है।
NASA के मुताबिक, यह तस्वीर 11 अगस्त 2026 को मंगल ग्रह के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:30 बजे ली गई थी। रोवर ने अपने Mastcam कैमरे से छह अलग-अलग तस्वीरें खींचीं, जिन्हें जोड़कर एक विस्तृत पैनोरमा तैयार किया गया। यह Curiosity के मिशन का 4,982वां मंगल दिवस यानी सोल था।
तस्वीर में सामने के हिस्से में नीले रंग के अलग-अलग शेड दिखाई देते हैं, जबकि क्षितिज पर सुबह की रोशनी में ऊबड़-खाबड़ चट्टानें नजर आती हैं। NASA ने बताया कि तस्वीरों को सामान्य Mastcam इमेज की तरह व्हाइट बैलेंस किए बिना प्रोसेस किया गया, जिससे मंगल की सुबह के प्राकृतिक रंगों और रोशनी को बनाए रखने में मदद मिली।
मंगल पर 16 किलोमीटर तक फैली हैं रहस्यमयी चट्टानें
ये यार्डैंग संरचनाएं मंगल ग्रह के माउंट शार्प के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में लगभग 16 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। माउंट शार्प करीब 5 किलोमीटर ऊंचा पर्वत है, जिस पर Curiosity रोवर वर्ष 2014 से चढ़ाई करते हुए अलग-अलग चट्टानी परतों का अध्ययन कर रहा है।
मिशन के दौरान रोवर ने ऊंचाई में लगभग 1 किलोमीटर की बढ़ोतरी हासिल की है। अब वैज्ञानिक इन असामान्य चट्टानों के और करीब पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी बनावट और उत्पत्ति से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकें।
मंगल की चट्टानों में छिपा है प्राचीन पर्यावरण का इतिहास
माउंट शार्प पर तलछटी चट्टानों की कई परतें मौजूद हैं। इनमें मंगल के प्राचीन पर्यावरण से जुड़े संकेत सुरक्षित हो सकते हैं। इन परतों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि अरबों साल पहले इस क्षेत्र में झीलें और नदियां मौजूद थीं।
समय के साथ मंगल का पर्यावरण बदलता गया और वहां मौजूद जलस्रोत सूख गए। इसके बाद चट्टानों में नमकयुक्त खनिजों के जमाव रह गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब पर्वत पर नई सामग्री जमा होना कम हुई, तब तेज हवाओं ने लंबे समय तक चट्टानों का कटाव किया होगा। इससे यार्डैंग जैसी विशिष्ट आकृतियां बन सकती हैं।
हालांकि, इस खास चट्टानी परत की बनावट कुछ अलग है। इसका रंग आसपास के इलाके से मेल नहीं खाता और इसकी परतें असामान्य दिशा में झुकी हुई दिखाई देती हैं। इस वजह से वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इसके निर्माण में केवल हवा का कटाव ही जिम्मेदार नहीं रहा होगा।
NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में Curiosity मिशन के वैज्ञानिक अश्विन वासवदा के अनुसार, इस परत का रंग और चट्टानों का झुकाव इसे आसपास के भूभाग से अलग बनाता है। उन्होंने कहा कि इसकी उत्पत्ति को लेकर अभी निश्चित जानकारी नहीं है। एक संभावना यह भी है कि प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों से निकली राख यहां जमा हुई हो।
2027 में यार्डैंग चट्टानों की जांच करेगा Curiosity
Curiosity इस समय अपने पांचवें विस्तारित मिशन के दूसरे वर्ष में है। इस चरण की शुरुआत मकड़ी के जाले जैसी दिखने वाली बॉक्सवर्क रिज संरचनाओं की जांच से हुई थी। आने वाले समय में रोवर सल्फेट और कार्बोनेट खनिजों से भरपूर चट्टानी परतों के बीच आगे बढ़ेगा।
ये खनिज मंगल पर प्राचीन समय में पर्यावरण के सूखने और परिस्थितियों में आए बदलावों के संकेत दे सकते हैं। मिशन वैज्ञानिकों का लक्ष्य 2027 में यार्डैंग संरचनाओं के निचले हिस्से तक पहुंचना है।
वहां पहुंचने के बाद Curiosity अपने रोबोटिक आर्म और वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से चट्टानों का अध्ययन कर सकेगा। इससे उनकी संरचना और संभावित उत्पत्ति को समझने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों को क्यों है इस खोज से उम्मीद?
यार्डैंग चट्टानों का अध्ययन मंगल के भूगर्भीय इतिहास की नई कड़ियां जोड़ सकता है। अगर वैज्ञानिक यह पता लगा पाते हैं कि इन परतों का निर्माण हवा के कटाव, ज्वालामुखीय राख या अन्य भूगर्भीय प्रक्रियाओं से हुआ, तो इससे अरबों साल पहले मंगल के पर्यावरण में आए बदलावों को समझने में मदद मिलेगी। हालांकि, इन चट्टानों की वास्तविक उत्पत्ति की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
