रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से फसल नुकसान झेल रहे किसानों को राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने प्रभावित फसलों के सर्वेक्षण और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा दावा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश में अब तक फसल क्षति की कुल 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। सरकार ने संबंधित बीमा कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
59,666 सूचनाएं मिलीं, सर्वेक्षण जारी
कृषि विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
प्रदेश में फसल क्षति की कुल 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें से 88 मामलों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों में आकलन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिला कलेक्टरों, कृषि विभाग के उप संचालकों और संबंधित बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण समय पर पूरा करने को कहा गया है।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में जिला स्तर पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
48 घंटे में नियुक्त होगा सर्वेयर, 15 दिन में भुगतान का प्रावधान
कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों को फसल नुकसान की सूचना निर्धारित समय में दर्ज कराने की अपील की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रक्रिया इस प्रकार निर्धारित है:
- फसल क्षति होने के 72 घंटे के भीतर सूचना दर्ज कराना जरूरी है।
- सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी सर्वेयर नियुक्त करेगी।
- सर्वेयर को 10 दिनों के भीतर नुकसान का सर्वेक्षण पूरा करना होगा।
- सर्वेक्षण के बाद 15 दिनों के भीतर पात्र दावा राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाएगी।
किसान फसल नुकसान की सूचना कृषि रक्षक पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज करा सकते हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 11 फसलें शामिल
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में कुल 11 फसलें अधिसूचित हैं। इनमें धान (सिंचित), धान (असिंचित), मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी शामिल हैं।
योजना के प्रावधानों के अनुसार, स्थानीय आपदा के तहत जलप्लावन से नुकसान होने पर धान की सिंचित और असिंचित फसल को छोड़कर अन्य अधिसूचित फसलों के लिए बीमा दावा भुगतान का प्रावधान है।
कटाई के बाद खेत में रखी फसल को भी बीमा सुरक्षा
योजना के तहत कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल यानी करपा को भी निर्धारित शर्तों के अधीन बीमा सुरक्षा मिलती है। यदि कटाई के 14 दिनों के भीतर चक्रवात, चक्रवाती वर्षा या बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान होता है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार बीमा दावा किया जा सकता है।
किसान कहां से लें सहायता?
फसल क्षति और बीमा दावा प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, उप संचालक कृषि या संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के समन्वय से सर्वेक्षण तथा दावा भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि पात्र किसानों को योजना के प्रावधानों के अनुसार आर्थिक सहायता मिल सके।
