रायपुर। छत्तीसगढ़ में नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार करीब 125 नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा घटाने या समाप्त करने पर विचार कर रही है। इनमें नौ ऐसे नेता और अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें फिलहाल Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। उनकी सुरक्षा घटाकर Z कैटेगरी की जा सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों की सुरक्षा Z से Y और X श्रेणी में करने की तैयारी है, जबकि कुछ की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त हो सकती है। इस संबंध में जल्द आदेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
गृह विभाग के सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस फैसले से करीब 200 पुलिस जवान सुरक्षा ड्यूटी से मुक्त हो सकते हैं। इन जवानों को दूसरे मोर्चों पर तैनात किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि प्रदेश में पुलिस बल की कमी के बीच सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
इन नौ नेताओं और अधिकारियों की Z+ सुरक्षा घट सकती है
जिन नौ नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z श्रेणी में किए जाने की चर्चा है, उनमें शामिल हैं:
- मंत्री केदार कश्यप
- पूर्व मंत्री महेश गागड़ा
- पूर्व मंत्री कवासी लखमा
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज
- पूर्व विधायक चंदन कश्यप
- पूर्व विधायक देवती कर्मा
- छबिंद्र कर्मा
- आशीष कर्मा
- दिव्यराज कर्मा
इनके अलावा करीब 125 अन्य नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय और नामों की आधिकारिक पुष्टि आदेश जारी होने के बाद ही होगी।
बस्तर में नक्सल हिंसा के कारण मिली थी विशेष सुरक्षा
बस्तर लंबे समय तक देश के सबसे अधिक नक्सल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। इसी वजह से वहां के जनप्रतिनिधियों और कुछ अन्य लोगों को विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा नौ नेताओं और अधिकारियों को भी Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी।
गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा में कटौती से करीब 200 पुलिस जवान उपलब्ध हो सकेंगे। उनका इस्तेमाल अन्य जरूरी पुलिस व्यवस्थाओं में किया जा सकता है। प्रदेश में पुलिस बल की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। रायपुर कमिश्नरेट में कामकाज के लिए आसपास के जिलों से पुलिस बल मंगाकर तैनाती किए जाने की बात कही गई है।
महेंद्र कर्मा के परिवार को मिली थी Z+ सुरक्षा
Z+ सुरक्षा में शामिल अधिकारियों में दुर्ग में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर आशीष कर्मा का नाम भी है। वे बस्तर टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे हैं। वर्ष 2013 में झीरम घाटी हमले में नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने आशीष कर्मा को अनुकंपा नियुक्ति देकर डिप्टी कलेक्टर बनाया था। महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा और उनके तीनों बेटों छबिंद्र, आशीष तथा दिव्यराज को झीरम हमले के बाद Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। बाद में आशीष कर्मा के प्रशासनिक सेवा में आने के बावजूद उनकी सुरक्षा जारी रही।
Z+ सुरक्षा में तैनात रहते हैं 24 से 25 जवान
रिपोर्ट में बताया गया है कि Z+ श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 24 से 25 जवान तैनात रहते हैं। संबंधित व्यक्ति की सरकारी गाड़ी के आगे पुलिस की पायलट गाड़ी और पीछे हथियारबंद जवानों से भरी फॉलो गाड़ी चलती है।
आशीष कर्मा के मामले में इस सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रशासनिक कामकाज और फील्ड पोस्टिंग को लेकर असहज स्थिति बनने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वे करीब सात साल से राज्य प्रशासनिक सेवा में हैं, लेकिन अब तक एसडीएम पद पर पदस्थ नहीं हो पाए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें फील्ड में जिम्मेदारी देने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयों की बात कही गई है।
सुरक्षा की समीक्षा के बाद जारी हो सकता है आदेश
करीब 125 नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा में बदलाव की तैयारी को पुलिस बल के बेहतर उपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह प्रस्तावित बदलाव है। अंतिम आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन लोगों की सुरक्षा किस श्रेणी में रखी जाएगी और किनकी सुरक्षा समाप्त की जाएगी।
