आज 22 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। पंचांग के अनुसार एकादशी रात 9:43 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। आज पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सुबह 7:06 बजे तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। अतिगण्ड योग शाम 4:29 बजे तक है, फिर सुकर्मा योग लगेगा।
आज का पंचांग
- दिन: मंगलवार
- तारीख: 22 सितंबर 2026
- विक्रम संवत: 2083 (गुजरात अनुसार 2082)
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद ऋतु
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: एकादशी, रात 9:43 बजे तक; इसके बाद द्वादशी
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा सुबह 7:06 बजे तक, फिर श्रवण
- योग: अतिगण्ड शाम 4:29 बजे तक, फिर सुकर्मा
- राहुकाल: शाम 3:33 से 5:04 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:28 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:34 बजे
- दिशाशूल: उत्तर दिशा
आज पद्मा एकादशी का व्रत
पंचांग के अनुसार 22 सितंबर 2026 को पद्मा एकादशी है। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। सनातन पंचांग में पद्मा एकादशी के व्रत और इसके माहात्म्य को पढ़ने-सुनने से पापों के नाश की धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया गया है।
एकादशी पर करें राम नाम का जाप
एकादशी के दिन पंचांग में “राम रामेति रामेति…” मंत्र के जाप का उल्लेख किया गया है। इसमें धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र के पाठ को विष्णु सहस्रनाम के जाप के समान पुण्यदायी बताया गया है।
एकादशी पर इन चीजों से बचने की मान्यता
सनातन पंचांग में एकादशी के दिन कुछ चीजों से परहेज करने की धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख है। इसके अनुसार:
- एकादशी के दिन बाल न कटवाने की मान्यता है।
- चावल और साबूदाना का सेवन वर्जित बताया गया है।
- शिम्बी यानी सेम का सेवन न करने का उल्लेख है।
- दोनों पक्षों की एकादशी पर आंवले के रस से स्नान करने को धार्मिक रूप से पुण्यदायी बताया गया है।
ये बातें धार्मिक मान्यताओं और पंचांग में दिए गए उल्लेखों पर आधारित हैं।
चतुर्मास में पात्र और पलाश की पत्तल
चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के बजाय अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करने की धार्मिक सलाह दी गई है। पंचांग में इसे स्कंद पुराण से जुड़ा उल्लेख बताया गया है।
इसके अलावा चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करने को पापनाशक बताया गया है।
दुकान में बरकत के लिए बताए गए धार्मिक उपाय
पंचांग में कारोबार में बरकत के लिए एक धार्मिक उपाय का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार सुबह घर से पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तिलक लगाकर निकलने और दुकान पर कपूर जलाने की बात कही गई है।
साथ ही दुकान में गुरुदेव और गणपति जी की तस्वीर रखने तथा गणेश गायत्री मंत्र का पांच या 11 बार जाप करने का उल्लेख है।
गणेश गायत्री मंत्र:
“एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि। तन्नोदंती प्रचोदयात॥”
यह जानकारी सनातन पंचांग में प्रकाशित धार्मिक मान्यताओं और उपायों पर आधारित है।
स्रोत: सनातन पंचांग, संपादक अंजनी बहन निलेश ठक्कर, प्रकाशन स्थल सूरत, गुजरात।
