छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का विस्तार किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को योजना के तहत आयोजित सम्मान समारोह में बताया कि अब इस योजना का लाभ 100 की जगह 200 छात्रों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक प्रदेश के विकास की मजबूत नींव हैं। उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और आगे बढ़ने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
33 जिलों के 200 बच्चों को मिलेगा लाभ
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 छात्रों के साथ की गई थी। अब इसके तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों के 200 मेधावी बच्चों को शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत कक्षा 6 से 12वीं तक बच्चों को आवासीय संस्थानों में मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे संस्थान शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी प्रतिभाशाली बच्चे की पढ़ाई और सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। सही अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने पर प्रतिभा को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
श्रमिकों के खातों में 39.67 करोड़ रुपये ट्रांसफर
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न श्रम कल्याण योजनाओं के तहत 1,45,841 श्रमिकों के बैंक खातों में 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में अलग-अलग श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से 774 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए श्रमिकों को दी गई है।
शिक्षा के साथ कई क्षेत्रों में सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल अच्छे स्कूलों में दाखिले तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के तीन बोर्डों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, पेंशन, कौशल विकास, रोजगार और आवास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने छात्रों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत व अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी या उद्यमी बनने का लक्ष्य रख सकते हैं।
विदेश में पढ़ाई के लिए भी सहायता
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में IIT, IIM और AIIMS जैसे प्रमुख संस्थान मौजूद हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण और विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को सहायता देने की दिशा में भी प्रावधान किए जा रहे हैं। उन्होंने बस्तर के दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी पहल के जरिए इन क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में योजना के लाभार्थी छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए। बीजापुर के अतिश ने बताया कि वह DPS राजनांदगांव में पढ़ाई कर रहा है और आगे चलकर IAS अधिकारी बनना चाहता है। वहीं कबीरधाम की छात्रा इशिका डहरे, जो RPS में पढ़ रही हैं, ने बताया कि योजना से उनकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता और आत्मविश्वास में काफी सुधार हुआ है। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने छात्रों के साथ भोजन किया और उनसे अनौपचारिक बातचीत भी की। उन्होंने बच्चों को जिज्ञासु बने रहने, अनुशासन का पालन करने और पढ़ाई के प्रति लगातार समर्पित रहने की सलाह दी।
