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बस्तर SP ऑफिस में 3 करोड़ से ज्यादा का वेतन घोटाला, CBI जांच की मांग

बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में वेतन घोटाले के बाद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच बस्तर SP कार्यालय में करोड़ों का वेतन घोटाला, पूरे संभाग में जांच की मांग

बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सामने आए करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले ने अब पूरे बस्तर संभाग की वेतन भुगतान व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वेतन रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर सरकारी राशि का अतिरिक्त भुगतान कराया गया। मामले में तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

अब एक शिकायत/पत्र के जरिए केवल जगदलपुर एसपी कार्यालय तक जांच सीमित रखने के बजाय बस्तर संभाग के सभी पुलिस कार्यालयों के वेतन आहरण और भुगतान रिकॉर्ड का टेस्ट ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी एजेंसियों से जांच कराने की मांग भी शामिल है।

वेतन रिकॉर्ड में हेरफेर से सामने आया मामला

पहले सामने आई जांच रिपोर्टों के मुताबिक, बस्तर एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव किए गए। आरोप है कि डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर अतिरिक्त राशि का भुगतान कराया गया। आंतरिक और बाहरी ऑडिट के दौरान गड़बड़ी सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी।

जून 2026 में पुलिस ने मामले में तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी राशि का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।

पूरे बस्तर संभाग के रिकॉर्ड की जांच की मांग

अब सामने आई शिकायत में दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और कोंडागांव समेत बस्तर संभाग के सभी पुलिस जिलों में वेतन आहरण और भुगतान रिकॉर्ड का टेस्ट ऑडिट कराने की मांग की गई है।

शिकायत में पिछले 5 से 7 वर्षों के वेतन भुगतान रिकॉर्ड का विशेष वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। तर्क दिया गया है कि यदि वेतन भुगतान की डिजिटल प्रक्रिया में ऐसी कमजोरी रही है, जिसका इस्तेमाल सरकारी राशि के अनधिकृत भुगतान के लिए किया जा सकता है, तो यह जांच जरूरी है कि कहीं वही तरीका दूसरे कार्यालयों में भी तो इस्तेमाल नहीं हुआ।

हालांकि, अन्य जिलों में भी ऐसा घोटाला हुआ है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह एक शिकायत में की गई जांच की मांग है।

DDO और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

शिकायत में आहरण एवं संवितरण अधिकारी यानी DDO की भूमिका और वित्तीय निगरानी व्यवस्था की भी जांच की मांग की गई है। इसमें यह पता लगाने की बात कही गई है कि संदिग्ध वेतन बिल किस स्तर पर तैयार हुए, किसने उनका सत्यापन किया और भुगतान को किस अधिकारी ने मंजूरी दी।

यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो शिकायतकर्ता ने जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

CBI की आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग

शिकायत में पूरे वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए CBI से पड़ताल कराने की मांग की गई है। साथ ही सरकारी राशि किन खातों में पहुंची, कितनी रकम निकाली गई और किसी अन्य वित्तीय माध्यम में उसका इस्तेमाल हुआ या नहीं, इसकी मनी ट्रेल जांचने का सुझाव दिया गया है।

शेयर बाजार या क्रिप्टोकरेंसी जैसे माध्यमों में संभावित निवेश की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन माध्यमों में सरकारी राशि के निवेश की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और यह शिकायत में की गई जांच की मांग है।

FIU-IND से वित्तीय लेन-देन की पड़ताल का सुझाव

शिकायत में वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कराने का सुझाव भी दिया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी खाते से निकली रकम की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाना बताया गया है।

इसके साथ भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए तकनीकी नियंत्रण मजबूत करने का सुझाव दिया गया है। इसमें कर्मचारी के मूल वेतन, भत्तों और वास्तविक भुगतान में असामान्य बदलाव होने पर ऑटोमेटेड रेड फ्लैग जारी करने की व्यवस्था शामिल है।

दूसरे विभागों में भी टेस्टिंग की मांग

शिकायत में बस्तर पुलिस कार्यालयों के अलावा राज्य के बड़े वेतन भुगतान वाले विभागों में भी नमूना आधार पर जांच कराने की मांग की गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक निर्माण जैसे विभागों में डिजिटल वेतन प्रणाली के जरिए असामान्य बदलाव हुए हैं या नहीं, इसकी टेस्टिंग का सुझाव दिया गया है।

इस मांग के पीछे तर्क है कि यदि डिजिटल भुगतान प्रणाली में कोई तकनीकी कमजोरी सामने आती है, तो केवल एक कार्यालय की जांच से उसकी पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकती।

पुलिस ने तीन लोगों को भेजा जेल, जांच जारी

बस्तर के एसपी शलभ सिन्हा के मुताबिक, वेतन घोटाले के मामले में तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया है। पुलिस ने सरकारी राशि की रिकवरी के लिए संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की बात भी कही है।

मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित वित्तीय हेरफेर की पूरी प्रक्रिया कैसे चली, कितनी राशि का वास्तविक नुकसान हुआ और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

अब पूरे बस्तर संभाग के पुलिस कार्यालयों के वेतन रिकॉर्ड के टेस्ट ऑडिट की मांग पर क्या फैसला होता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल दूसरे जिलों में किसी समान घोटाले की पुष्टि नहीं हुई है; इसका पता आगे की जांच या ऑडिट से ही चल सकेगा।

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