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डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती, NPA लेने वालों की होगी निगरानी

MP में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस के नियम बदलने की तैयारी मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती

मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में सभी सरकारी डॉक्टरों के लिए प्रैक्टिस के नियम एक समान करने, नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) लेने वाले डॉक्टरों की निगरानी बढ़ाने और नर्सिंग होम में निजी प्रैक्टिस पर रोक जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

यह मामला खास तौर पर रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद चर्चा में आया है। इस मामले में शासन ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया था।

डॉक्टरों के लिए अलग-अलग हैं मौजूदा नियम

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के एकीकरण के बाद भी सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों में एकरूपता नहीं होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस से संबंधित शर्तें अधिक कड़ी हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी डॉक्टरों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस की अनुमति मिल सकती है।

डेंटिस्ट के मामले में भी प्रैक्टिस के लिए उपकरण रखने से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। वहीं, मेडिकल कॉलेजों के कुछ डॉक्टरों द्वारा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

घरों में पैथोलॉजी लैब चलाने के आरोप

रिपोर्ट में पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के कुछ फैकल्टी द्वारा घरों में लैब संचालित किए जाने का भी उल्लेख है। इसके अलावा कुछ निजी नर्सिंग होम में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के नाम प्रदर्शित किए जाने की बात कही गई है।

निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर को होने वाली आय का एक हिस्सा कॉलेज में जमा कराने से संबंधित नियम के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं।

NPA लेने वाले डॉक्टरों पर बढ़ सकती है निगरानी

प्रस्तावित बदलावों में नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) लेने वाले डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर विशेष निगरानी का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। NPA का उद्देश्य ऐसे चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस से अलग रखते हुए सरकारी सेवा में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल राज्य में एलोपैथिक चिकित्सा पेशे को विनियमित करने वाली वैधानिक संस्था है।

नर्सिंग होम में प्रैक्टिस पर रोक का प्रस्ताव

नए नियमों में सरकारी डॉक्टरों के निजी नर्सिंग होम में जाकर इलाज करने पर रोक लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। इसके साथ ही डॉक्टरों को अपने आवास पर सीमित रूप से प्रैक्टिस की अनुमति देने या निजी क्लीनिक खोलने पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य सरकारी सेवा और निजी प्रैक्टिस के बीच स्पष्ट सीमा तय करना है।

CMHO, सिविल सर्जन और डीन पर भी सख्ती

प्रस्तावित व्यवस्था में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे डॉक्टरों के लिए भी निजी प्रैक्टिस को लेकर कड़े नियम बनाए जा सकते हैं। इसमें CMHO, सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज डीन और अस्पताल अधीक्षक जैसे पद शामिल हैं। इन पदों पर कार्यरत डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की बात सामने आई है।

निगरानी के लिए समिति बनाने पर भी विचार

डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस से जुड़े नियमों की निगरानी के लिए एक समिति गठित किए जाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। समिति के जरिए यह देखा जा सकता है कि NPA लेने वाले डॉक्टर या प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सक नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

NPA बढ़ाने का भी प्रस्ताव

नियमों को सख्त करने के साथ NPA की राशि बढ़ाने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकारी डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस से दूर रखने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देना हो सकता है।

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