अब एडीएम और तहसीलदार की भूमिका भी जांच के घेरे में, सरकारी मुआवजा घोटाले की परतें खुलनी शुरू
बिलासपुर। बिलासपुर में सरकारी मुआवजा योजना में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने फर्जी सर्पदंश (सांप के काटने) का मामला बनाकर 4 लाख रुपये का सरकारी मुआवजा हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कथित ‘डायमंड गैंग’ के सदस्य डॉक्टर, वकील और एक सिपाही समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह ने सरकारी दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर सर्पदंश से मौत का फर्जी मामला तैयार किया। इसके आधार पर शासन से मिलने वाली 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का दावा कर राशि हासिल कर ली गई।
डॉक्टर, वकील और पुलिसकर्मी की मिलीभगत का आरोप
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका तय थी। आरोप है कि मेडिकल दस्तावेज तैयार कराने, कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने और सरकारी रिकॉर्ड में सहायता पहुंचाने के लिए डॉक्टर, वकील और पुलिसकर्मी की मिलीभगत से पूरा षड्यंत्र रचा गया।
सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
अब प्रशासनिक अधिकारियों पर भी जांच की आंच
मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच की आंच एडीएम (अपर जिला दंडाधिकारी) और संबंधित तहसीलदार तक पहुंच गई। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि मुआवजा स्वीकृत करने की प्रक्रिया में कहीं प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई।
यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस तरह के फर्जी सर्पदंश के मामलों के जरिए अन्य स्थानों पर भी सरकारी मुआवजा लिया गया है। जांच में बैंक लेन-देन, मेडिकल दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और अन्य रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सरकारी मुआवजा योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है।
