ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में बड़ा खुलासा, ED-CBI अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी
रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के हाथ एक कथित फर्जी पासपोर्ट लगा है, जिसमें तस्वीर सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि उस पर श्रीलंका के पूर्व स्पिनर अजंता मेंडिस का नाम दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और फर्जी पहचान से जुड़े पूरे तंत्र की जांच तेज कर दी है।
फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर इंडोनेशियाई फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर ओमान में प्रवेश किया था। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पासपोर्ट किस नेटवर्क के जरिए तैयार कराया गया और इसके सहारे किन-किन देशों की यात्रा की गई।
अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पहचान का इस्तेमाल भारत प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया को प्रभावित करने या उससे बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान
जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू (Vanuatu) की नागरिकता भी हासिल की थी। वहीं, अब सामने आए कथित फर्जी पासपोर्ट में उसकी जन्मतिथि और पहचान पहले के दस्तावेजों से अलग बताई गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग नाम, जन्मतिथि और राष्ट्रीयता का इस्तेमाल क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान छिपाने की सुनियोजित योजना का हिस्सा था।
इंटरपोल ने नहीं हटाया रेड नोटिस
इस बीच इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की वह याचिका भी खारिज कर दी है, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी।
सौरभ ने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित है, लेकिन CCF ने माना कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय अपराध और अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ा है। इसलिए उसके खिलाफ जारी रेड नोटिस को बरकरार रखा गया।
ED और CBI कई देशों में खंगाल रही नेटवर्क
महादेव बेटिंग ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) हजारों करोड़ रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क, मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं।
अब फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि सौरभ चंद्राकर ने किन-किन देशों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फर्जी पासपोर्ट बना जांच का नया केंद्र
जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह केवल भारत ही नहीं बल्कि संबंधित विदेशी देशों के कानूनों के तहत भी गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में लंबी जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
ओमान में गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों का पूरा फोकस सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
