बिलासपुर में सीवेज ट्रीटमेंट का बड़ा संकट

बिलासपुर में सीवेज ट्रीटमेंट का बड़ा संकट

अरपा नदी में गंदा पानी और सीवेज गिरने के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर बिलासपुर की मौजूदा सीवेज व्यवस्था की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक शहर से रोजाना औसतन 72.20 एमएलडी सीवेज निकलता है, जबकि 78 एमएलडी क्षमता वाले चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में सिर्फ 43.90 एमएलडी सीवेज का ही उपचार हो रहा है। इस तरह करीब 28.30 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है। यानी शहर से निकलने वाले कुल सीवेज का लगभग 40 फीसदी हिस्सा मौजूदा ट्रीटमेंट व्यवस्था से बाहर है। ऐसे में इसके अरपा नदी तक पहुंचने की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार की ओर से यह शपथपत्र वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने पेश किया।

बिलासपुर में 70 नाले, कुछ जगह सीधे नदी तक पहुंच रहा सीवेज

सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की 2026 की अनुमानित आबादी 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में कुल 70 नाले हैं, जिनमें 35 उत्तरी और 35 दक्षिणी छोर पर स्थित हैं। इनमें 5 उत्तरी और 6 दक्षिणी नाले प्रमुख हैं। इन्हीं नालों के जरिए सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाया जाता है। हालांकि कुछ स्थानों पर सीवेज के सीधे नदी में जाने की स्थिति भी बनी हुई है।

दो नए STP से बढ़ेगी ट्रीटमेंट क्षमता

शासन के अनुसार मंगला में 16 एमएलडी क्षमता वाले दो नए एसटीपी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें मंगला-बी की क्षमता 10 एमएलडी है और इसका करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य को 31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं मंगला-डी एसटीपी की क्षमता 6 एमएलडी है। इसका सिविल और इलेक्ट्रोमैकेनिकल काम पूरा हो चुका है और फिलहाल ट्रायल रन जारी है। दोनों प्लांट शुरू होने के बाद बिलासपुर की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 78 एमएलडी से बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी।

बिलासपुर में अरपा नदी में सीवेज और एसटीपी व्यवस्था

100% सीवेज ट्रीटमेंट की तैयारी

सरकार ने अपने शपथपत्र में मौजूदा एसटीपी की कम उपयोगिता को दूर करने की जरूरत भी बताई है। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग तकनीकी परीक्षण के आधार पर नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य शहर से निकलने वाले 100 फीसदी सीवेज का ट्रीटमेंट करने के बाद ही पानी अरपा नदी में छोड़ना है।

124 करोड़ की फायर ब्रिगेड खरीदी का रास्ता साफ

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान अग्निशमन वाहनों की खरीदी से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। प्रदेश में करीब 124 करोड़ रुपए की लागत से फायर ब्रिगेड वाहनों की खरीदी का रास्ता साफ हो गया है। 19 अगस्त को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद वित्त विभाग ने खरीदी के लिए निर्धारित राशि खर्च करने की समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति दी है। वित्त सचिव के शपथपत्र के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण पहले तय समय सीमा समाप्त हो गई थी। अब राशि खर्च करने की समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है। इससे करीब छह महीने से लंबित खरीदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। वाहनों की खरीदी के लिए टेंडर समेत अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई गई है।

फायर स्टेशनों के अपग्रेडेशन के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव

न्याय मित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि गृह सचिव के शपथपत्र में फायर स्टेशनों के अपग्रेडेशन और अग्निशमन उपकरणों की खरीदी के लिए करीब 100 करोड़ रुपए के प्रस्ताव का भी उल्लेख है। यह प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस पर अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इस दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और न्याय मित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को संबंधित जानकारी दी।

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