DMF घोटाला, ED के सामने छाबड़ा ने चबाए लाल डायरी के पन्ने

DMF घोटाला, ED के सामने छाबड़ा ने चबाए लाल डायरी के पन्ने

छत्तीसगढ़ के चर्चित DMF घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने लाल डायरी से जुड़ा एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य लाइजनर सतपाल सिंह छाबड़ा के घर से तलाशी के दौरान बरामद लाल डायरी में कथित लेन-देन का हस्तलिखित हिसाब दर्ज था। ED का दावा है कि पूछताछ के दौरान छाबड़ा ने डायरी के दो-तीन पन्ने कथित तौर पर चबाकर नष्ट करने की कोशिश की। वहीं, एक अन्य पन्ने को जेब में छिपाने का आरोप है, जिसे अधिकारियों ने बाद में बरामद कर लिया।

31 करोड़ रुपये के कथित कमीशन की जांच

ED के अनुसार, छाबड़ा पर करीब 31 करोड़ रुपये के कथित अवैध कमीशन लेन-देन से जुड़े होने का आरोप है। एजेंसी इस रकम के स्रोत, इस्तेमाल और अलग-अलग खातों के जरिए हुए लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि डायरी में दर्ज विवरण कथित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में अहम साबित हो सकते हैं। इसी वजह से डायरी के पन्नों को नष्ट करने की कथित कोशिश को ED ने साक्ष्य नष्ट करने के प्रयास के तौर पर देखा है।

कमीशन की रकम संपत्तियों में निवेश करने का आरोप

ED के आरोपों के मुताबिक, कथित कमीशन से हासिल रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय परिवार के सदस्यों, HUF, कारोबारी संस्थाओं और अन्य बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और बाद में संपत्तियों में निवेश किया गया। जांच में सैंड एग्रीटेक के नाम 19 भूखंड और सैंड स्टोन इंफ्रा के नाम 11 भूखंड खरीदे जाने का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी अब इन संपत्तियों और कथित अपराध आय के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

विक्रेताओं से करोड़ों रुपये मिलने का दावा

जांच के दौरान बीज निगम से जुड़े 13 विक्रेताओं से छाबड़ा को कथित तौर पर कुल 21.33 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। ED के अनुसार, इसमें 11.19 करोड़ रुपये बैंकिंग माध्यम से और 10.13 करोड़ रुपये नकद दिए जाने का दावा है। इसके अलावा, तीन विक्रेताओं से विनय गर्ग के माध्यम से कथित तौर पर 3.66 करोड़ रुपये और ओजस एग्रो केमिकल्स से नरेंद्र सिंह के जरिए 6.06 करोड़ रुपये नकद मिलने की बात भी जांच में सामने आई है।

20 से 32 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप

ED के मुताबिक, पूछताछ में छाबड़ा ने वर्ष 2019 से 2023 के दौरान बीज निगम से जुड़े काम करने वाली कंपनियों के सलाहकार के तौर पर काम करने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और बिलिंग से जुड़े काम कराने के बदले सामान के मूल मूल्य का 20 से 32 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। ED ने इस भुगतान को सामान्य सलाहकार या सेवा शुल्क मानने से इनकार किया है।

लाल डायरी के पन्नों में दर्ज रकम की जांच

तलाशी के दौरान बरामद डायरी के पन्नों में कई रकमों की प्रविष्टियां मिलने का दावा किया गया है। इनमें 60 लाख, 31.50 लाख, 7.50 लाख, 35 लाख और 30 लाख रुपये जैसी रकम का उल्लेख बताया गया है। कुछ प्रविष्टियों में ‘पटवारी अकाउंट’ और ‘रजिस्ट्री क्लियर’ जैसे शब्दों का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। ED के अनुसार, कथित कमीशन की करीब 9.11 करोड़ रुपये की रकम तीसरे पक्ष के बैंक खातों में भी भेजी गई।

मनी ट्रेल और अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही ED

फिलहाल जांच एजेंसी का फोकस कथित 31 करोड़ रुपये की अपराध आय के पूरे मनी ट्रेल, लाल डायरी के नष्ट किए गए पन्नों में दर्ज संभावित लेन-देन और इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *