रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने गृह निर्माण मंडल को राजनांदगांव के दो आवंटियों की जमा राशि ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने ₹21,83,567 की मूल राशि पर 19 फरवरी 2019 से वास्तविक भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए ₹50 हजार मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹20 हजार भी देने होंगे।
आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में सभी देय रकम का भुगतान आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर करने को कहा है। मामला अटल विहार आवास योजना, पेंड्री, राजनांदगांव का है, जहां दो आवंटियों ने मकान के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आवंटन रद्द करने और जमा रकम वापस करने की मांग की थी।
मकान की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं थे आवंटी
यह मामला गीता शुक्ला और निर्मल शुक्ला की शिकायत से जुड़ा है। दोनों ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की अटल विहार योजना के तहत स्व-वित्तीय योजना में जूनियर एमआईजी टाइप-1 भवन लेने के लिए 18 जुलाई 2012 से 31 जनवरी 2018 के बीच पांच अलग-अलग किस्तों में कुल ₹21,83,567 जमा किए थे।
आवंटियों का आरोप था कि मकान का निर्माण तय मानकों के अनुसार नहीं हुआ। उन्होंने शिकायत भी की, लेकिन उनके मुताबिक समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। इसके बाद दोनों ने मकान का आवंटन निरस्त करने और योजना की शर्तों के मुताबिक जमा रकम ब्याज सहित लौटाने की मांग की।
इस मामले में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, राजनांदगांव के संबंधित संपदा प्रबंधक को विपक्षी पक्ष बनाया गया था।
गृह निर्माण मंडल ने ब्याज देने का किया विरोध
आयोग के सामने गृह निर्माण मंडल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आवंटित मकान का निर्माण पूरा हो चुका था और आवंटियों को कब्जा लेने के लिए भी कहा गया था। मंडल के अनुसार, आवंटियों की ओर से रेरा, रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण और अन्य उपभोक्ता मंचों पर कार्यवाही किए जाने के कारण मामला लंबित रहा।
मंडल ने यह भी तर्क दिया कि आवंटन निरस्त होने की स्थिति में नियमों के तहत निर्धारित कटौती के बाद ही जमा राशि लौटाई जा सकती है। उसके मुताबिक, ऐसी स्थिति में ब्याज देने का प्रावधान नहीं था, इसलिए आवंटी 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज पाने के हकदार नहीं थे।
योजना की शर्तों को आयोग ने माना अहम
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य आयोग ने आवास योजना की शर्तों को महत्वपूर्ण माना। आयोग के मुताबिक, योजना में प्रावधान था कि यदि हितग्राही मकान के निर्माण कार्य या किए गए सुधारों से संतुष्ट नहीं है और आवंटन रद्द किया जाता है, तो जमा राशि 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाई जाएगी।
आयोग ने यह भी पाया कि आवंटियों की ओर से लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद मंडल ने उनकी जमा राशि वापस नहीं की। बाद में संबंधित मकान किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया, लेकिन मूल आवंटियों को उनकी रकम का भुगतान नहीं किया गया।
आयोग ने माना कि जब योजना की शर्तें जमा राशि पर ब्याज देने का अधिकार देती हैं, तो वैध आवेदन के बाद भी रकम वापस नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसी आधार पर मंडल को मूल राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया।
2019 से ब्याज, मुआवजा और वाद खर्च भी देना होगा
राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश के अनुसार, गृह निर्माण मंडल को निम्नलिखित भुगतान करने होंगे:
- मूल जमा राशि: ₹21,83,567
- ब्याज: 19 फरवरी 2019 से वास्तविक भुगतान तक 7.5 प्रतिशत सालाना
- मानसिक परेशानी का मुआवजा: ₹50,000
- मुकदमे का खर्च: ₹20,000
आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी देय रकम का भुगतान आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर किया जाए। यह फैसला आवास योजना की शर्तों के तहत जमा राशि वापस पाने की मांग कर रहे दोनों आवंटियों की शिकायत पर सुनवाई के बाद दिया गया।
