अगर आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो होम और कार लोन लेने वालों की चिंता बढ़ सकती है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के हालिया बैठक के मिनट्स में महंगाई को लेकर सतर्कता दिखाई गई है। इससे आने वाले समय में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
तीसरी तिमाही में महंगाई 5.9% तक पहुंचने का अनुमान
RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उनके अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मुख्य खुदरा महंगाई दर 5.9 फीसदी तक पहुंच सकती है। अगर महंगाई लगातार बढ़ती है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक भविष्य में मौद्रिक नीति को सख्त करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, ब्याज दरों को लेकर अंतिम फैसला उस समय उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति के आधार पर होगा।
अभी 5.25% है रेपो रेट
अगस्त की MPC बैठक में RBI ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर है। यह लगातार चौथी बैठक है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में बदलाव नहीं किया है। RBI ने फिलहाल अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर फैसला करेगा।
महंगाई बढ़ी तो क्या बढ़ सकता है ब्याज?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में औसत महंगाई करीब 2 फीसदी रही थी। इसी अवधि में रेपो रेट को घटाकर 5.25 फीसदी किया गया। वहीं, चालू वित्त वर्ष में कोर महंगाई यानी खाद्य और ईंधन को छोड़कर महंगाई का औसत अब तक करीब 3.93 फीसदी रहा है। पूरे वित्त वर्ष में इसके करीब 4.3 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान बताया गया है।
होम और कार लोन की EMI पर क्या असर होगा?
फिलहाल रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं हुई है, इसलिए मौजूदा होम लोन या कार लोन की EMI पर तुरंत कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर आने वाली किसी MPC बैठक में RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक भी अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसका असर खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम और अन्य लोन पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में लोन लेने वालों की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है, यह बैंक की ब्याज दर और ग्राहक के लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल RBI आंकड़ों पर रख रहा है नजर
देश में बैंक डिपॉजिट की वृद्धि करीब 15.4 फीसदी के 10 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने और लोन की मांग बढ़ने के बीच RBI महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर नजर रख रहा है। इसलिए फिलहाल ब्याज दर बढ़ाने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में महंगाई, ईंधन और खाद्य कीमतों समेत आर्थिक आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि RBI अपनी मौद्रिक नीति में अगला कदम क्या उठाता है।
