‘विरक्त’ मजबूत कहानी, दमदार संवाद, सुमधुर कर्णप्रिय गीत एवं संगीत की फिल्म

फिल्म समीक्षा विरक्त

सार्थक इंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्मित, ‘विरक्त’ फिल्म, निर्माता निर्देशक, ‘एस के प्रसाद’ की दूसरी फीचर फिल्म है, जो पूर्णतया उत्तर प्रदेश में निर्मित है। सामाजिक सरोकार एवं मानव प्रवृत्तियों के विद्रूप स्वरूप का फिल्मांकन अत्यंत दुस्साहस का विषय है, आधुनिक परिवेश में यह फिल्म हमें विमल रॉय, श्याम बेनेगल, प्रकाश झा एवं मृणाल सेन जैसे यथार्थवादी, प्रयोगधर्मी, साहसिक फिल्मकारों की याद ताजा करती नजर आती है, यह फिल्म समाज के उस तथा कथित स्वरूप को चित्रित कर मानवीय मूल्यों के ह्रास की कथा कहती है।

फिल्म ‘विरक्त’ में गीत संगीत एवं संवाद आदि दर्शकों की को अंत तक बांधे रखता है, फिल्म के सभी किरदारों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है, मुख्य अभिनेता वैभव सिंह ने कहानी को आगे बढ़ाते हुए हर उम्र को ईमानदारी निभाया है। फिल्म में बाल कलाकार क्षितिज सिंह ने दर्शकों का मन मोह लिया। अभिनेत्री एलीशा सिंह और खुशी सिंह अपनी अलग-अलग शेड की भूमिकाओं से दर्शको को चौंकाती और रोमांचित करती है। खलनायक की महेंद्र की भूमिका में विजय गुप्ता, एवं दरोगा की भूमिका में अरशद खान की भूमिका ने दर्शकों का ध्यान खींचा, फिल्म में अनुज श्रीवास्तव, देवेन्द्र सिंह के पास जितना कुछ भी करने को था, वो उन्होने ईमानदारी से किया है, भोजपुरी फिल्म की आइटम गर्ल संजना मिश्रा और प्रफुल्ल त्रिपाठी की स्क्रीन प्रेजेंस दर्शको को सीट से बॉंध कर रखती है,

फिल्म का सबसे सशक्त पहलू फिल्म का गीत एवं संगीत है, राहुल बकसरिया का स्वर एवं संगीत लोगो की जुबान पर चढ़ने वाला है ‘ओ सजना’और राजकुमार की आवाज में ‘अपनी तबाहियों’ जिसे ओम प्रसाद ओमी ने संगीतबद्व किया है। नवोदित पार्श्व गायिका आद्या शर्मा ने अपने भावपूर्ण गायन से ‘रोते-रोते’ गीत को सुमधुर बनाया है, श्रेया दीक्षित की आवाज में ‘रब्बा दुहाई’ श्रोताओं को थिरकने को मजबूर करता है। जिसे राहुल बकसारिया और सौरभ शर्मा ने संगीत दिया है। टाइटल सांग “ओ साजना ” बृजेश शर्मा, और ‘रोते रोते’ गीत, एस के प्रसाद द्वारा लिखा गया है सूर्यानंद सूर्याकर जी द्वारा लिखा गीत, ‘नैनों से तुझको निहारा करूं’ आपको एक अलग ही ‘औरा’ में लेकर जाता है।

‘विरक्त’ एक मजबूत कहानी, दमदार संवाद और सुमधुर कर्णप्रिय गीत एवं संगीत वाली फिल्म है जिन्हें कुछ नया देखना हो कुछ अच्छा सुनना हो उनके लिए ‘विरक्त’ एक अच्छा विकल्प है

राजेंद्र विश्वकर्मा हरिहर

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