आज का पंचांग- रायपुर, छत्तीसगढ़ (शनिवार, 12 सितंबर 2026)

आज का पंचांग- रायपुर, छत्तीसगढ़ (शनिवार, 12 सितंबर 2026)

गणेश चतुर्थी 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व माना जाता है। इस साल 14 सितंबर 2026, सोमवार को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी के साथ 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की विशेष पूजा और साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन गणपति को प्रसन्न करने के लिए अभिषेक, दूर्वा, गुड़ और विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करने के साथ कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं।

गणेश चतुर्थी पर करें ये 11 उपाय

1. गणेशजी का अभिषेक करें
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का शुद्ध जल से अभिषेक करने की परंपरा है। इसके साथ गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और बाद में मावे के लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।

2. घर में गणेश यंत्र स्थापित करें
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गणेश यंत्र को शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर इसकी विधि-विधान से स्थापना और पूजा करने की परंपरा है।

3. हाथी को हरा चारा खिलाएं
यदि जीवन में परेशानियां चल रही हों तो गणेश चतुर्थी पर हाथी को हरा चारा खिलाने और गणेश मंदिर में प्रार्थना करने का उपाय बताया गया है।

4. घी और गुड़ का भोग लगाएं
धन संबंधी समस्याओं के लिए गणेशजी को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाने की मान्यता है। बाद में यह भोग गाय को खिलाने की परंपरा बताई गई है।

5. 21 गुड़ की गोलियां चढ़ाएं
गणेश मंदिर जाकर भगवान गणेश को 21 गुड़ की गोलियां और दूर्वा अर्पित करें। धार्मिक मान्यता में इसे मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है।

6. पीली गणेश प्रतिमा की पूजा करें
गणेश चतुर्थी पर पीले रंग की गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने का उपाय बताया गया है। पूजा के दौरान हल्दी की पांच गांठें अर्पित करने और मंत्र जाप के साथ दूर्वा चढ़ाने की परंपरा भी बताई गई है।

7. जरूरतमंदों को दान करें
गणेश मंदिर में दर्शन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को कपड़े, भोजन, फल या अनाज का दान किया जा सकता है। इसके साथ दक्षिणा देने की भी धार्मिक परंपरा है।

8. विवाह की कामना के लिए मालपुए का भोग
बेटी के विवाह में बाधा आने की स्थिति में गणेशजी को मालपुए का भोग लगाने और व्रत रखने का उपाय बताया गया है। यह धार्मिक मान्यता पर आधारित उपाय है।

9. दूर्वा से गणेश बनाकर पूजा करें
दूर्वा से भगवान गणेश का स्वरूप बनाकर उनकी पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है। इस दौरान मोदक, गुड़, फल और मिष्ठान का भोग लगाया जा सकता है।

10. विवाह संबंधी बाधा के लिए पीली मिठाई चढ़ाएं
लड़के के विवाह में परेशानी होने पर गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाने की मान्यता है।

11. व्रत रखकर अथर्वशीर्ष का पाठ करें
गणेश चतुर्थी पर व्रत रखकर शाम के समय गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने और तिल से बने लड्डुओं का भोग लगाने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर मनोकामना के लिए प्रार्थना की जाती है।

गणेश उत्सव में घर लाएं ये 5 शुभ वस्तुएं

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में गणेश उत्सव के दौरान कुछ वस्तुओं को घर में रखना शुभ बताया गया है। मान्यता के अनुसार इनसे भगवान गणेश के साथ देवी लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त हो सकती है।

1. नृत्य करती गणेश प्रतिमा
नृत्य करते हुए गणेशजी की प्रतिमा को घर में रखना शुभ माना जाता है। इसे मुख्य द्वार की ओर भगवान गणेश की दृष्टि रहने की तरह रखने की मान्यता बताई गई है।

2. बांसुरी
वास्तु परंपरा में घर में बांसुरी रखना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे सकारात्मक वातावरण बना रहता है और वास्तु संबंधी समस्याएं कम होती हैं।

3. एकाक्षी नारियल
एकाक्षी नारियल को धार्मिक रूप से विशेष माना जाता है। इसकी पूजा करने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहने की मान्यता है।

4. पूजा स्थल में शंख
घर के मंदिर में शंख रखने की धार्मिक परंपरा है। वास्तु मान्यताओं में इसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।

5. कुबेर की प्रतिमा
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कुबेर को धन का देवता माना जाता है और उनका संबंध उत्तर दिशा से बताया जाता है। इसलिए उत्तर दिशा में कुबेर की प्रतिमा रखने की परंपरा है।

पंचांग के अनुसार आज का दिन

दिन: शनिवार
मास: भाद्रपद, शुक्ल पक्ष
तिथि: प्रतिपदा सुबह 7:46 बजे तक, इसके बाद द्वितीया
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी दोपहर 12:55 बजे तक, फिर हस्त
योग: शुभ शाम 3:09 बजे तक, फिर शुक्ल
राहुकाल: सुबह 9:30 से 11:02 बजे तक
सूर्योदय: सुबह 6:26 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:43 बजे
दिशाशूल: पूर्व दिशा

पंचांग में आज चंद्र-दर्शन का समय शाम 6:34 से रात 7:09 बजे तक बताया गया है। प्रतिपदा तिथि को कूष्मांड यानी कुम्हड़ा न खाने की धार्मिक मान्यता भी दी गई है। वहीं चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के उपयोग तथा पलाश के पत्तों की पत्तल में भोजन को लेकर भी धार्मिक परंपराएं बताई गई हैं।

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