भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें? जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि और दान के नियम

भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें? जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि और दान के नियम

Devshayani Ekadashi : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षभर में 24 एकादशी आती हैं और अधिकमास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है। इनमें देवशयनी एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चार माह का चातुर्मास आरंभ हो जाता है।

इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा सुख-समृद्धि और मोक्ष का आशीर्वाद मिलता है।

देवशयनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, सुबह 9:12 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे
  • उदया तिथि के अनुसार व्रत: 25 जुलाई 2026 (शनिवार)
  • पूजा का शुभ समय: 25 जुलाई को सुबह 4:32 बजे से शाम 4:16 बजे तक

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जो 20 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, जबकि पूजा, जप, तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।

देवशयनी एकादशी पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन स्नान कर स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर धूप, पुष्प, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।

भगवान विष्णु का विधिवत पूजन करें, विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें तथा अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

भगवान विष्णु को क्या भोग लगाएं?

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु पंचामृत, पीली बर्फी, बेसन के लड्डू या अन्य सात्विक मिष्ठान अर्पित कर सकते हैं। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान को अन्न का भोग नहीं लगाया जाता।

व्रत रखने के नियम

  • पूजा के समय व्रत का संकल्प लें।
  • श्रद्धानुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखा जा सकता है।
  • सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन एवं भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
  • कई धार्मिक परंपराओं में भूमि पर विश्राम और रात्रि जागरण का भी उल्लेख मिलता है।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा मान्धाता के राज्य में भयंकर सूखा पड़ गया था। वर्षा न होने से प्रजा अत्यंत कष्ट में थी। अनेक यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

तब राजा महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुंचे। महर्षि ने उन्हें आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने की सलाह दी। राजा ने स्वयं व्रत रखा और पूरे राज्य में लोगों को भी व्रत करने के लिए प्रेरित किया।

कथा के अनुसार भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए, राज्य में वर्षा हुई और अकाल समाप्त हो गया। तभी से देवशयनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

देवशयनी एकादशी पर दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, पीले फल, पीली मिठाई, जल से भरा पात्र, छाता तथा जरूरतमंदों को भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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