इंसानी मल से कंक्रीट बनाने का अनोखा प्रयोग

इंसानी मल से कंक्रीट बनाने का अनोखा प्रयोग

इंसानी कचरे को लेकर वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया है, जो भविष्य में निर्माण क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। शोधकर्ताओं ने ट्रीट किए गए इंसानी मल से बायोचार तैयार किया और इसे कंक्रीट में सीमेंट के एक हिस्से के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया। लैब टेस्ट में अलग-अलग मात्रा में बायोचार मिलाकर तैयार किए गए कंक्रीट नमूनों की जांच की गई। 91 दिनों की क्योरिंग के बाद 10% बायोचार वाले मिश्रण की फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ में 42% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अलग-अलग परीक्षणों में बायोचार की मात्रा के अनुसार परिणाम अलग रहे।

सीधे सीवेज से नहीं लिया गया था मटीरियल

रिसर्च में इस्तेमाल किया गया मटीरियल सीधे सीवेज सिस्टम से निकालकर कंक्रीट में नहीं मिलाया गया था। मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के सिविल इंजीनियर रघुवेश तिवारी के नेतृत्व वाली टीम ने वारंगल की एक ट्रीटमेंट फैसिलिटी से फिकल-स्लज बायोचार प्राप्त किया। सबसे पहले स्लज को सुखाया गया। इसके बाद इसे कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में करीब 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया गया। इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस कहा जाता है। इसमें ऑर्गेनिक मटीरियल बदलकर कार्बन से भरपूर ठोस पदार्थ यानी बायोचार में परिवर्तित होता है।

कंक्रीट में 5%, 10% और 15% बायोचार का इस्तेमाल

बायोचार तैयार होने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे पीसकर बारीक पाउडर बनाया। इसके बाद कंक्रीट मिक्स में सीमेंट के एक हिस्से को बायोचार से बदला गया। टीम ने 5%, 10% और 15% बायोचार वाले तीन अलग-अलग मिश्रण तैयार किए। इनके परिणामों की तुलना सामान्य कंक्रीट मिश्रण से की गई। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि सीमेंट की कितनी मात्रा को बायोचार से बदला जा सकता है और इससे कंक्रीट की कार्यक्षमता पर क्या असर पड़ता है।

कंक्रीट पर किए गए कई टेस्ट

रिसर्चर्स ने तैयार किए गए कंक्रीट नमूनों पर कई तरह के परीक्षण किए। इनमें कम्प्रेशिव स्ट्रेंथ, फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ, सिकुड़न, पानी सोखने की क्षमता और पोरॉसिटी यानी कंक्रीट में मौजूद छिद्रों की मात्रा की जांच शामिल थी। परिणामों में बायोचार की मात्रा के अनुसार अंतर देखा गया। कई मानकों पर 5% बायोचार वाला मिश्रण बेहतर प्रदर्शन करता दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि निर्माण सामग्री में अधिक मात्रा में वेस्ट मटीरियल मिलाने के बजाय सीमित मात्रा में उसका इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन कंस्ट्रक्शन की दिशा में संभावना

कंक्रीट निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़ा माना जाता है, जबकि इंसानी कचरे का सुरक्षित निपटान भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ट्रीट किए गए फिकल स्लज से तैयार बायोचार का निर्माण सामग्री में इस्तेमाल वेस्ट मैनेजमेंट और टिकाऊ निर्माण के लिए संभावित विकल्प बन सकता है। हालांकि, यह अभी एक प्रयोगशाला-आधारित अध्ययन है। इसलिए बड़े पैमाने पर निर्माण में इसके इस्तेमाल से पहले इसकी मजबूती, सुरक्षा, टिकाऊपन और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर आगे के परीक्षण जरूरी होंगे। इस प्रयोग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस कचरे को आमतौर पर बेकार समझा जाता है, उसे प्रोसेस करके निर्माण सामग्री में उपयोग करने की संभावना तलाश की जा रही है।

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