जनवरी में रिटेल महंगाई दर दिसंबर (4.59%) के मुकाबले 0.53% घटकर 4.06% रही। यह अक्टूबर 2019 के बाद सबसे निचला स्तर है, तब रिटेल महंगाई दर 4.62% थी। साल दर साल देखें तो रिटेल महंगाई दर में 3.54% की कमी आई है। जनवरी 2020 में यह 7.6% थी।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटेस्टिक एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन (MoSPI) ने शुक्रवार को रिटेल महंगाई के साथ-साथ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन का भी डेटा जारी किया। दिसंबर में IIP1% बढ़कर 135.9 हो गई है।
सब्जियां सस्ती लेकिन दाल, अंडे और मीट महंगे
इस साल जनवरी में महंगाई दर घटी है। इसकी मुख्य वजह सब्जियों की कीमत में गिरावट है। सालाना आधार पर जनवरी में सब्जियों के दाम 15.84% कम रहे। दूसरी ओर ऑयल और फैट सेगमेंट में 19.71% और दाल की कीमत में 13.39% की बढ़त रही। अंडे का दाम 12.85%, मीट और मछलियों के सेगमेंट में 12.54% की बढ़ोतरी रही। नेशनल स्टैटेस्टिकल्स ऑफिस (NSO) के मुताबिक जनवरी में फूड बास्केट में दाम बढ़ने की दर 1.89% रही, जो पिछले साल दिसंबर में 3.41% रही थी।
महंगाई को कम रखने के लिए RBI ने प्रमुख ब्याज दरों को स्थाई रखा
यह लगातार दूसरा महीना रहा, जब रिटेल महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 4% (-/+2%) दायरे में है। इससे पहले दिसंबर में भी रिटेल महंगाई दर 4.59% रही थी। RBI मॉनेटरी पॉलिसी में प्रमुख ब्याज दरों को तय करते हुए सबसे ज्यादा महंगाई दर का ही ध्यान रखता है। नतीजतन, उसने हर दो महीने होने वाली MPC बैठक में लगातार चार बार दरों को समान रखा है, जिसमें रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% बरकरार हैं।
इंडस्ट्रियल ग्रोथ को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का सपोर्ट
सरकारी डेटा के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन इंडेक्स (IIP) में बेसिक मेटल, फार्मा, पेट्रोकेमिकल उत्पादों के साथ-साथ दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में भी ग्रोथ दर्ज की गई। दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 1.6% और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर 5.1% ऊपर चढ़े। दूसरी ओर माइनिंग सेक्टर में सालाना आधार पर 4.8%, गिरावट दर्ज की गई।
इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) नवंबर में 1.9% फिसल गया था। हालांकि अक्टूबर और सितंबर महीने में भी यह पॉजिटिव रहा था। इससे पहले लगातार छह महीने इंडेक्स में निगेटिव ग्रोथ दर्ज जा रही था। इसकी मुख्य वजह कोरोना महामारी रही।

