भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के अनुसार, समझौता लागू होते ही न्यूजीलैंड के करीब 57 फीसदी मौजूदा निर्यात को भारत में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
न्यूजीलैंड के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, लंबी अवधि में करीब 82 फीसदी निर्यात पूरी तरह शुल्क मुक्त हो जाएगा। वहीं, लगभग 13 फीसदी निर्यात पर टैरिफ में बड़ी कटौती की जाएगी। इस तरह समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के करीब 95 फीसदी मौजूदा निर्यात पर या तो टैरिफ खत्म हो जाएगा या उसमें बड़ी कमी आएगी।
लकड़ी और फॉरेस्ट्री उत्पादों को शुरुआती फायदा
FTA के तहत न्यूजीलैंड के कई प्रमुख उत्पादों को भारत के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। इनमें लकड़ी और फॉरेस्ट्री से जुड़े उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें शुरुआती चरण में ही टैरिफ रियायतों का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा सेब, कीवीफ्रूट, भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और समुद्री उत्पादों के लिए भी अलग-अलग टैरिफ रियायतें और कोटा तय किए गए हैं।
इससे न्यूजीलैंड के कृषि, फूड और फॉरेस्ट्री सेक्टर से जुड़े निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार में कारोबार के नए अवसर खुल सकते हैं।
भारत को न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस
भारत सरकार के अनुसार, FTA में भारतीय निर्यात के लिए न्यूजीलैंड में 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच का प्रावधान किया गया है।
इससे भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम आधारित क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि भारत ने न्यूजीलैंड के सभी उत्पादों के लिए अपना बाजार पूरी तरह नहीं खोला है। भारत ने डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों को व्यापार समझौते से बाहर रखा है।
भारत में 20 अरब NZ डॉलर निवेश का वादा
व्यापार के साथ-साथ निवेश को भी FTA में महत्व दिया गया है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत सरकार के अनुसार, प्रस्तावित निवेश दोनों देशों के बीच लंबे समय के आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
निवेश बढ़ने से भारत में न्यूजीलैंड की कंपनियों की कारोबारी मौजूदगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को भी विस्तार मिलने की संभावना है।
करीब 4 अरब NZ डॉलर का है दोनों देशों का व्यापार
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। जून 2026 तक के 12 महीनों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार करीब 3.99 अरब न्यूजीलैंड डॉलर रहा।
इसी अवधि में भारत न्यूजीलैंड के लिए वस्तुओं और सेवाओं का नौवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार था।
नए FTA का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच को बढ़ाना और व्यापार में मौजूद टैरिफ बाधाओं को कम करना है। समझौते के लागू होने के बाद भारतीय और न्यूजीलैंड के निर्यातकों को कई क्षेत्रों में शुल्क संबंधी राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या होगा FTA का असर?
FTA के तहत शुरुआती चरण में न्यूजीलैंड के करीब 57 फीसदी मौजूदा निर्यात को भारत में ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा। लंबी अवधि में यह हिस्सा बढ़कर करीब 82 फीसदी तक पहुंचने की बात कही गई है।
वहीं भारत को न्यूजीलैंड में 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच का प्रावधान दिया गया है। हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर भारत ने कुछ उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है।
इस व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच निर्यात, निवेश और बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में नई संभावनाएं बनने की उम्मीद है।
