जबलपुर: शहर के अधारताल स्थित तालाब में इन दिनों एक खूबसूरत जल पक्षी ने लोगों और पक्षी प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। तालाब के आसपास पर्पल स्वैम्पहेन यानी जलमुर्गी दिखाई देने के बाद प्रकृति प्रेमियों के बीच इसकी चर्चा हो रही है। चमकीले नीले-बैंगनी रंग का शरीर, लाल चोंच और माथे पर लाल ढाल जैसी संरचना इस पक्षी को खास पहचान देती है। लंबे लाल-गुलाबी पैर भी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। अधारताल जैसे शहरी जलस्रोत में इस पक्षी की मौजूदगी को स्थानीय जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्पल स्वैम्पहेन यानी जलमुर्गी
पर्पल स्वैम्पहेन को हिंदी में जलमुर्गी अथवा नीलकंठी जलमुर्गी के नाम से जाना जाता है। यह सामान्य तौर पर तालाब, झील और दलदली क्षेत्रों जैसे जलस्रोतों के आसपास नजर आती है, जहां जलीय वनस्पतियां पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों। इसके चमकीले रंग और विशिष्ट शारीरिक बनावट के कारण इसे दूसरे जल पक्षियों से आसानी से अलग पहचाना जा सकता है। यह पानी के आसपास उगने वाली वनस्पतियों के बीच विचरण करती दिखाई देती है।
अधारताल तालाब बना पक्षियों का आश्रय
विशेषज्ञों के अनुसार अधारताल का तालाब लंबे समय से स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण रहा है। अलग-अलग मौसम में यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं। तालाब का पानी और आसपास की वनस्पतियां पक्षियों को भोजन, आश्रय और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में पर्पल स्वैम्पहेन का यहां नजर आना शहर के भीतर मौजूद जलस्रोतों के महत्व को भी सामने लाता है। जबलपुर नर्मदा नदी, तालाबों, जलाशयों, पहाड़ियों, जंगलों और हरित क्षेत्रों से घिरा होने के कारण प्राकृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। बरगी क्षेत्र, डुमना नेचर पार्क, ग्वारीघाट, तिलवारा और शहर के कई तालाब पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान हैं।
स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को मिलता है ठिकाना
जबलपुर में अलग-अलग मौसम के दौरान प्रवासी पक्षियों के साथ स्थानीय पक्षियों की भी कई प्रजातियां देखी जाती हैं। जलस्रोत इनके लिए भोजन और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। अधारताल में पर्पल स्वैम्पहेन की मौजूदगी इसी प्राकृतिक वातावरण की ओर संकेत करती है। शहर के बीचोंबीच किसी आकर्षक जल पक्षी का दिखाई देना पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास अनुभव है।
जलस्रोतों का संरक्षण जरूरी
पक्षी विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि शहर के तालाब सिर्फ पानी जमा करने की जगह नहीं हैं। ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि तालाबों में पानी स्वच्छ रहे, जलीय वनस्पतियां बनी रहें और आसपास हरियाली सुरक्षित रहे, तो कई पक्षी प्रजातियों को प्राकृतिक आवास मिल सकता है। इसके लिए जलस्रोतों में कचरा और प्लास्टिक कम करना तथा प्रदूषण रोकना जरूरी है।
प्रकृति को करीब से देखने का मौका
अधारताल तालाब में पर्पल स्वैम्पहेन का दिखना जबलपुरवासियों के लिए शहर की प्राकृतिक संपदा को करीब से देखने का अवसर है। साथ ही यह याद दिलाता है कि शहरी जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण जैव विविधता बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
