कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करेंगे और व्रत रखेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है।
4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी
देशभर में इस दिन घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण की झांकियां सजाई जाएंगी। बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार कर उन्हें पालने में झुलाने की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाएगी। दिनभर व्रत और पूजा के बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना, आरती और जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा।
मथुरा में निशीथ पूजा का शुभ समय
श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष भव्यता के साथ मनाया जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार, निशीथ पूजा का समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। इसी दौरान भगवान कृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी। धार्मिक मान्यता में निशीथ काल को जन्माष्टमी पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
रोहिणी नक्षत्र का रहेगा संयोग
इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बताया गया है। पंचांग गणना के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी। इस वजह से पर्व के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।
5 सितंबर को व्रत पारण और दही हांडी
मथुरा की गणना के अनुसार जन्माष्टमी व्रत का पारण 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकता है। हालांकि व्रत पारण की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोल सकते हैं। जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा। दही हांडी में ऊंचाई पर मटकी लटकाकर गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं।
मथुरा-वृंदावन में होंगे विशेष आयोजन
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने के कारण जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
