झीरम घाटी केस मामले में NIA कोर्ट द्वारा 10 दोषियों की सजा पर हुआ फैसला

झीरम घाटी केस मामले में NIA कोर्ट द्वारा 10 दोषियों की सजा पर हुआ फैसला

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद दोषियों की सजा पर फैसला होने जा रहा है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अब 16 सितंबर को अदालत सजा की अवधि तय करेगी।

मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सजा को लेकर अपनी-अपनी दलीलें रखी जा चुकी हैं। अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग की है, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपियों की परिस्थितियों और अब तक की हिरासत को देखते हुए कम सजा देने की मांग की है।

अभियोजन ने क्यों मांगी अधिकतम सजा

अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि झीरम घाटी हमला पूर्व नियोजित षड्यंत्र, रेकी और योजना के तहत किया गया था। अभियोजन के अनुसार हमले में राजनीतिक नेताओं, सुरक्षा कर्मियों और आम लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए।

अभियोजन पक्ष के सहयोगी अधिवक्ता संजय शुक्ला ने आरोपियों पर लागू धाराओं के तहत अधिकतम सजा की मांग की। उनकी दलील थी कि यदि आरोपी नक्सलियों के दबाव में काम करने की बात कह रहे हैं तो उसके समर्थन में गवाह क्यों पेश नहीं किया गया।

अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि नक्सलियों तक राशन पहुंचाने से उन्हें सहायता मिली और हमले की योजना को मदद मिली। इसी आधार पर अभियोजन ने मृत्युदंड और न्यूनतम आजीवन कारावास की दलील रखी।

बचाव पक्ष ने किया मृत्युदंड का विरोध

दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने मृत्युदंड का विरोध किया। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी करीब 12 साल से सजा भुगत रहे हैं और उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी ग्रामीण हैं और उनके अनुसार वे नक्सलियों के दबाव में काम कर रहे थे। वकील ने अदालत से आरोपियों को सुधार का अवसर देने की मांग की।

बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा देने और अब तक भुगती गई अवधि को ध्यान में रखते हुए आगे की सजा में राहत देने का अनुरोध किया।

13 साल बाद आया दोषसिद्धि का फैसला

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी इलाके में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। सितंबर 2026 में विशेष NIA अदालत ने मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।

अब अदालत के सामने अगला सवाल दोषियों को दी जाने वाली सजा की अवधि का है। 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा मामले में दोषसिद्ध आरोपियों के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सजा तय करेगी।

आज तय होगी दोषियों की सजा

झीरम घाटी मामले में अदालत ने दोषियों को लेकर फैसला पहले ही सुना दिया है। अब 16 सितंबर 2026 को सजा की मात्रा पर फैसला होना है।

अभियोजन जहां मामले की गंभीरता और हमले की परिस्थितियों को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहा है, वहीं बचाव पक्ष ने आरोपियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों, हथियार बरामद न होने और लंबे समय से हिरासत में रहने का हवाला देकर राहत की मांग की है।

अब अदालत का फैसला यह तय करेगा कि दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को कानून के तहत कौन-सी सजा दी जाती है।

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