मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक सामान्य जैविक पड़ाव है, बीमारी नहीं। आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होने वाली इस अवस्था में मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। यदि किसी महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड नहीं आता और इसके पीछे कोई अन्य कारण नहीं है, तो इसे मेनोपॉज माना जाता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा जैन के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हर महिला में इनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।
मेनोपॉज में दिख सकते हैं ये लक्षण
मेनोपॉज के दौरान अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना यानी हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना और नींद में परेशानी आम लक्षणों में शामिल हैं। इसके अलावा मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, चिंता, उदासी, योनि में सूखापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी भी हो सकती है। कुछ महिलाओं में वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने, बालों के पतले होने या झड़ने और त्वचा के रूखेपन जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। मेनोपॉज के बाद हड्डियों की घनत्व कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ सकता है।
जीवनशैली में बदलाव से मिल सकती है राहत
मेनोपॉज के लक्षणों को बेहतर तरीके से संभालने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। रोजाना करीब 30 मिनट पैदल चलना, योग और स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां दिनचर्या में शामिल की जा सकती हैं। खानपान में दूध, दही, हरी सब्जियां और बादाम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। कैफीन, शराब और बहुत मसालेदार भोजन का सेवन कम करने से कुछ महिलाओं को हॉट फ्लैशेज और नींद जैसी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
हार्मोन थेरेपी हर महिला के लिए एक जैसी नहीं
मेनोपॉज के लक्षण ज्यादा परेशान करने वाले हों तो डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) समेत अन्य उपचार विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। HRT हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना और योनि में सूखापन जैसे लक्षणों को कम करने में प्रभावी हो सकती है और हड्डियों के कमजोर होने से बचाने में भी मदद कर सकती है। हालांकि, HRT शुरू करने से पहले डॉक्टर से इसके फायदे और संभावित जोखिमों पर चर्चा करना जरूरी है। यदि महिला की बच्चेदानी मौजूद है, तो सामान्यतः एस्ट्रोजन के साथ प्रोजेस्टोजन की जरूरत होती है, क्योंकि इससे गर्भाशय की अंदरूनी परत पर पड़ने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
कैल्शियम और विटामिन-D पर भी दें ध्यान
मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार कैल्शियम और विटामिन-D की जरूरत पूरी की जा सकती है। योनि में सूखापन होने पर डॉक्टर द्वारा सुझाई गई क्रीम, स्थानीय एस्ट्रोजन या लुब्रिकेंट जैसे विकल्प उपयोग किए जा सकते हैं। नींद और मूड से जुड़ी परेशानी में नियमित दिनचर्या, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज और परिवार या दोस्तों से बातचीत मददगार हो सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें
यदि 12 महीने तक पीरियड बंद रहने के बाद दोबारा योनि से ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो, तो इसे सामान्य मेनोपॉज का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। इसी तरह यदि ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो, लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हों या परेशानी लगातार बनी हुई हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
मेनोपॉज जीवन का सामान्य पड़ाव है। सही खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के साथ महिलाएं इस बदलाव को स्वस्थ और सहज तरीके से संभाल सकती हैं।
