सूरज के सबसे करीब मौजूद बुध ग्रह (Mercury) को लेकर वैज्ञानिकों ने एक अहम अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बुध की सतह पर मौजूद उभार और चट्टानी किनारे इस बात के संकेत देते हैं कि ग्रह के अंदरूनी हिस्से के ठंडा होने के साथ उसका आकार सिकुड़ता गया। वैज्ञानिकों ने बुध की सतह पर ऐसी संरचनाओं का अध्ययन किया है, जो ग्रह के सिकुड़ने के दौरान बनी मानी जाती हैं। इनमें कुछ चट्टानी किनारे करीब 1.6 किलोमीटर तक ऊंचे और सैकड़ों किलोमीटर तक फैले हो सकते हैं।
बुध को समझना क्यों है मुश्किल
नासा के मुताबिक, बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और सूरज से इसकी औसत दूरी करीब 5.8 करोड़ किलोमीटर है। यह सिर्फ 88 दिनों में सूरज की एक परिक्रमा पूरी कर लेता है। करीब 4.5 अरब साल पहले गैस और धूल से बने इस पथरीले ग्रह का शुरुआती दौर काफी गर्म और उथल-पुथल भरा रहा होगा। उस समय अंतरिक्ष में मौजूद चट्टानी पिंडों की टक्कर से ग्रह को अतिरिक्त गर्मी मिली। समय के साथ जब बुध ने अपनी अंदरूनी गर्मी खोनी शुरू की, तो उसके अंदरूनी हिस्से के सिकुड़ने से सतह पर दबाव पड़ा और चट्टानी संरचनाएं बनने लगीं।
नए शोध में क्या सामने आया
यह अध्ययन Geophysical Research Letters में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अरबों वर्षों तक हुई टक्करों से बने गड्ढों और उनके मलबे ने बुध की सतह पर मौजूद कई पुरानी संरचनाओं को ढक दिया। इसी वजह से ग्रह के सिकुड़ने की वास्तविक मात्रा का अनुमान लगाना लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहा है। शोध में इस बात का आकलन करने की कोशिश की गई है कि बुध के ठंडा होने के दौरान उसकी सतह और अंदरूनी संरचना में कितना बदलाव आया।
पहले के अनुमान से ज्यादा सिकुड़ सकता है बुध
शोधकर्ताओं की गणना के मुताबिक, बुध पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में 10 से 30 प्रतिशत अधिक सिकुड़ा हो सकता है। अध्ययन में इसकी त्रिज्या में करीब 11.6 किलोमीटर तक बदलाव की संभावना बताई गई है। इससे पहले किए गए अध्ययनों में बुध की त्रिज्या में करीब 1 से 2 किलोमीटर और कुछ आकलनों में 7 किलोमीटर तक बदलाव का अनुमान लगाया गया था।
बुध के कोर से जुड़े रहस्य खुल सकते हैं
वैज्ञानिकों के लिए बुध का सिकुड़ना सिर्फ ग्रह के आकार में बदलाव का सवाल नहीं है। इससे उसके मेटल कोर और अंदरूनी संरचना के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। अगर बुध अपेक्षा से ज्यादा सिकुड़ा है, तो इसके पीछे उसके अपेक्षाकृत बड़े मेटल कोर, सिलिकॉन जैसे हल्के तत्वों की कम मात्रा या शुरुआती दौर में अधिक तापमान जैसे कारण हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि बुध की सिकुड़न को बेहतर तरीके से समझने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सौरमंडल के शुरुआती दौर में इस छोटे और रहस्यमयी ग्रह का विकास किस तरह हुआ।
