मुख्यधारा @रायपुर.
नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स NDRF: चक्रवाती तूफान बिपरजॉय गुजरात में तबाही मचाने के बाद अब राजस्थान की ओर तरफ बढ़ गया है. लोगों को आपदा से बचाने के लिए यहां कम से कम एनडीआरएफ की 33 टीमें तैनाती की गई है नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स के जवान आपदा के समय संकटमोचक बनकर हमेशा तैयार रहते हैं और अपनी जान की बाजी लगातर दूसरों की जान बचाते हैं. चाहे वो कोई साइक्लोन हो या फिर ट्रेन हादसा या फिर कोई भूकंप ही क्यों न हो.
वैसे तो नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का गठन 2006 में किया गया. मगर इसकी जरूरत 90 के दशक से ही पड़ने लगी थी. 1999 में ओडिशा में सुपर चक्रवात आया था. साल 1998 में गुजरात में तूफान ने भयंक तबाही मचाई थी. इसके कुछ साल बाद 2001 में गुजरात में जोरदार भूकंप आया था. 2004 में भारत में सुनामी आई थी. इन तमाम आपदाओं से गुजरने के बाद भारत ने इस फोर्स के गठन के बारे में सोची. एक ऐसा फोर्स जो आपदा के समय लोगों की जिंदगी बचा सके, उसके खतरे से निपट सके.
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005
2005 में संसद में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट पारित किया गया. इसके बाद नेशनल, स्टेट और डिस्ट्रिक्ट लेवल के आपदाओं के लिए इसका एक कानूनन ब्लूप्रिंट तैयार किया गया. 2006 में एनडीआरएफ अस्तित्व में आया. शुरुआत में एनडीआरएफ की क्षमता 8 बटालियनों की थी. मगर इस समय इसकी क्षमता 16 बटालियनों की है. हर बटालियन में 1149 जवान होते हैं. एनडीआरएफ में देश के 16 अलग-अलग स्थानों पर तैनात बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स के लगभग 18,500 कर्मी हैं.
स्थापना के बाद 2008 में पहला सबसे बड़ा टास्क
एनडीआरएफ की स्थापना के बाद उसके लिए सबसे बड़ा चैलेंज 2008 में कोसी नदी में आई बाढ़ थी. 19 अगस्त 2008 को कोसी बैराज में दरार के तुरंत बाद एनडीआरएफ की टीमों को बिहार ले जाया गया था. एनडीआरएफ ने 780 बाढ़ बचाव प्रशिक्षित कर्मियों के साथ 153 उच्च गति वाली मोटर चालित नौकाओं को एयरलिफ्ट किया. बाढ़ के दौरान 1,00,000 से अधिक प्रभावित लोगों को बचाया गया था. तब से एनडीआरएफ के जवान आपदा के समय अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरों की जान बचाते हैं.

