छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगाथाओं और पारंपरिक कलाओं को मंच देने के लिए राजधानी रायपुर में तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से ‘विभागीय आयोजन 2026’ के तहत होने वाला यह कार्यक्रम 6, 7 और 8 सितंबर को सिविल लाइंस स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित होगा। तीनों दिन कार्यक्रम की शुरुआत शाम 7 बजे से होगी। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। लोकगाथा, लोकगीत, लोकनाट्य और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान को दर्शकों के सामने जीवंत किया जाएगा।
भरथरी-पंडवानी से नाचा और गम्मत तक
‘लोकरंग पर्व’ में छत्तीसगढ़ की चर्चित लोक विधाओं की विशेष प्रस्तुतियां होंगी। इनमें भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे। लोकनृत्यों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक देखने को मिलेगी।
लोकगीतों और पारंपरिक गायन की भी होगी प्रस्तुति
तीन दिवसीय पर्व में केवल नृत्य और लोकनाट्य ही नहीं, बल्कि प्रदेश की पारंपरिक गायन शैलियों को भी मंच मिलेगा। बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी विधाओं की प्रस्तुतियां आयोजन का हिस्सा रहेंगी। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गायन और नृत्य की लय के साथ मुक्ताकाशी मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं का विविध रंग देखने को मिलेगा।
लोक कलाकारों को मिलेगा मंच
‘लोकरंग पर्व’ का उद्देश्य सिर्फ सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसके जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं और लोक कलाकारों को मंच देने के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
लोकगाथाओं और गीतों में छत्तीसगढ़ के सामाजिक जीवन, परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक मिलती है। वहीं पारंपरिक नृत्य और नाट्य विधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाती हैं।
तीन शाम छत्तीसगढ़ी संस्कृति के नाम
6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे रायपुर का मुक्ताकाशी मंच लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आएगा। तीन दिनों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच ‘लोकरंग पर्व 2026’ छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोक सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रस्तुत करेगा।
