सावन माह के अंतिम सोमवार पर छत्तीसगढ़ के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्त गंगाजल, दूध, दही और बेलपत्र लेकर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पहुंचे। जगह-जगह हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे।
कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में उमड़ा जनसैलाब
धर्मनगरी राजिम में त्रिवेणी संगम तट पर स्थित प्राचीन कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सावन के आखिरी सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शन के लिए भक्तों की कतार लग गई। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भक्तों की भीड़ और लगातार गूंजते जयकारों से पूरा राजिम शिवमय नजर आया।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान माता सीता के साथ यहां शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव की पूजा की थी। त्रिवेणी संगम के कारण राजिम को ‘प्रयाग नगरी’ भी कहा जाता है। सावन के महीने में कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर विशेष आस्था का केंद्र बन जाता है।
बलौदाबाजार में भी शिवालयों में भक्तों की भीड़
सावन के अंतिम सोमवार पर बलौदाबाजार जिले के शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सोमवार के साथ एकादशी और दोपहर बाद प्रदोष काल का संयोग होने के कारण भक्तों में इस दिन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।इस अवसर पर विभिन्न स्थानों से कांवड़ यात्राएं भी निकाली गईं। बोलबम कांवर यात्रा संघ, बलौदाबाजार पिछले 23 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा आयोजित कर रहा है।
संघ के सदस्य सोनपुरी स्थित बाबा भुतेश्वर नाथ मंदिर के कुंड से जल लेकर करीब 30 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। इसके बाद ग्राम रामपुर में शिवनाथ नदी के किनारे स्थित स्वयंभू शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
सावन के अंतिम सोमवार पर निकली इस कांवड़ यात्रा में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। धार्मिक माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

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