मुंबई के मशहूर वड़ा पाव पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा है, लेकिन इसे अखबार में लपेटकर या परोसने वाले विक्रेताओं पर फूड सेफ्टी नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने खाने को अखबार में पैक करने की प्रथा पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
अखबार में खाना पैक करने पर क्यों सख्ती
खाने को अखबार में लपेटने को लेकर मुख्य चिंता प्रिंटिंग इंक और अन्य रसायनों के भोजन में पहुंचने की है। खासकर तैलीय और गर्म खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने पर अखबार की स्याही या अन्य अवांछित पदार्थ भोजन में मिल सकते हैं। इसी वजह से खाद्य कारोबारियों को अखबार के बजाय फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
मुंबई में 55 दुकानों की जांच
मुंबई में चलाए गए एक फूड सेफ्टी अभियान के दौरान 55 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 26 जगहों पर खाद्य पदार्थों को अखबार में परोसा या पैक किया जा रहा था। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई।
वड़ा पाव बेचने पर नहीं है रोक
इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है, लेकिन मामला वड़ा पाव पर प्रतिबंध लगाने का नहीं है। विक्रेता पहले की तरह वड़ा पाव बेच सकते हैं, बशर्ते वे खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें और खाने के लिए सुरक्षित पैकेजिंग का इस्तेमाल करें।
यानी मुंबई के वड़ा पाव प्रेमियों को अपना पसंदीदा स्नैक छोड़ने की जरूरत नहीं है। बदलाव सिर्फ खाना किस सामग्री में पैक या परोसा जा रहा है, इसे लेकर है।
स्कूल कैंटीन में भी खाद्य मानकों पर जोर
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का असर स्कूल कैंटीन तक भी पहुंचा है। कुछ स्कूलों में अधिक फैट, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों को हटाने की कार्रवाई की गई है। इस संदर्भ में वड़ा पाव जैसे लोकप्रिय स्नैक्स का भी उल्लेख हुआ है। कुल मिलाकर मुंबई में चल रही कार्रवाई का फोकस वड़ा पाव बंद करना नहीं, बल्कि सुरक्षित पैकेजिंग और बेहतर खाद्य मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
