उत्तराखंड के 61 फीसदी हिस्से में न कोई थाना है, न कोई पुलिस, रेवेन्यू डिपार्टमेंट ही करता है पुलिस का काम
2018 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था को समाप्त करने के आदेश दिए थे, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है 2013 में केदारनाथ में आपदा के समय तत्कालीन सीए विजय बहुगुणा ने कहा था कि यदि पहाड़ी इलाकों में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था होती तो आपदा से…
