तहलका मैगजीन के संस्थापक तरुण तेजपाल ने यौन हिंसा मामले में 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वह खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार मानते हैं और उनकी बेगुनाही साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
‘सबूतों पर सही तरीके से विचार नहीं हुआ’
फैसले के बाद जारी बयान में तरुण तेजपाल ने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उनका दावा है कि मामले में ऐसे सबूत हैं जो उनकी बेगुनाही साबित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेगी।
हाईकोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
जांच अधिकारी सुनीता सावंत के अनुसार, अदालत ने तेजपाल को आत्मसमर्पण के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
पहले भी राजनीतिक बदले की बात कह चुके हैं तेजपाल
फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
गोवा सरकार ने फैसले को बताया न्याय की जीत
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि घटना गोवा में हुई थी, इसलिए राज्य सरकार और पुलिस ने मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाया और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब तहलका मैगजीन में कार्यरत एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
मामले में 30 नवंबर 2013 को तेजपाल की गिरफ्तारी हुई थी। वर्ष 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। इसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई।
