जेब्रा के शरीर पर दिखने वाली काली-सफेद धारियां पिछले कुछ समय से बदल रही हैं।

जेब्रा के शरीर पर दिखने वाली काली-सफेद धारियां पिछले कुछ समय से बदल रही हैं। इनकी धारियों के पैटर्न में बदलाव के साथ गोल्डन बाल भी दिखाई दे रहे हैं। जेब्रा पर हुई कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च चौंकाने वाली है। रिसर्च कहती है, जेब्रा का जीन बदल रहा है, इसलिए ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

140 जेब्रा पर हुई रिसर्च

वैज्ञानिकों ने इसे समझने के लिए 133 सामान्य और 7 बदली हुई धारियों वाले जेब्रा के DNA की जांच की। ये सभी जेब्रा अफ्रीका के नेशनल पार्क के थे। रिसर्च के मुताबिक, ऐसा होने की वजह प्रजनन में क्रॉस कनेक्शन का होना है। जैसे मादा जेब्रा के साथ किसी दूसरे स्तनधारी जानवर ने प्रजनन किया हो।

जेब्रा के जीन में गड़बड़ी के मामले बढ़ रहे हैं, इससे इनकी संख्या घट सकती है।
जेब्रा के जीन में गड़बड़ी के मामले बढ़ रहे हैं, इससे इनकी संख्या घट सकती है।

जीन में वैरायटी खत्म होने से इनकी संख्या भी घट रही
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कहते हैं, इनके जीन में वैरायटी घटने या खत्म होने से कई तरह के खतरे बढ़ सकते हैं। जैसे- जीन में खराबी होना, बीमारियों का बढ़ना और प्रजनन की क्षमता का घट जाना। यही कारण है कि मैदानी क्षेत्रों में जेब्रा विलुप्त हो रहे हैं।

नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक, जेब्रा के प्राकृतिक वासस्थल में इंसान कब्जा कर रहा है। यहां बिल्डिंग और सड़कें बनाई जा रही हैं। इसी वजह से अफ्रीका में 5 लाख जेब्रा प्रभावित हो चुके हैं।

बदलाव से जेब्रा ही नहीं जिराफ भी जूझ रहे

हाल ही में जिराफ कंजर्वेशन फाउंडेशन की एक रिसर्च सामने आई थी। रिसर्च कहती है, जिराफ में बौनेपन के मामले भी सामने आए हैं। इनके अगले पैर छोटे और गर्दन लम्बी है। नतीजा, गर्दन और पैरों के बीच तालमेल न बैठने पर इन्हें चलने-फिरने में दिक्कतें आ रही हैं।

जेब्रा के शरीर पर मौजूद काली-सफेद धारियां उसे हॉर्सफ्लाई से बचाती हैं।
जेब्रा के शरीर पर मौजूद काली-सफेद धारियां उसे हॉर्सफ्लाई से बचाती हैं।

जेब्रा के शरीर पर काली-सफेद धारियां क्या काम करती हैं?

जेब्रा पर काली-सफेद धारियों का काम समझने के लिए हंगरी की इवोव्स लॉरेंड यूनिवर्सिटी ने रिसर्च की। रिसर्च के मुताबिक, ये धारियां जेब्रा खून चूसने वाली हॉर्सफ्लाई से बचाती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये धारियां प्रकाश को परावर्तित करती हैं जिससे हॉसफ्लाई भ्रमित होती है और शिकार को देख नहीं पाती।

जेब्रा के बाद रिसर्च को और भी बेहतर तरीके से समझने के लिए इंसानी पुतलों पर भी ऐसी ही धारियां पेंट की गईं।

शोध में पाया गया कि हॉर्सफ्लाई सफेद पुतलों से दूर रहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सफेद के मुकाबले भूरे रंग के पुतले की ओर हॉउसफ्लाई 10 गुना ज्यादा ज्यादा आकर्षित हुईं।