गर्मी के मौसम में बिजली गुल होना किसी परेशानी से कम नहीं है। खासकर तब जब कई घंटों तक बिजली वापस न आए। ऐसे में इन-बिल्ट बैटरी वाले पंखे एक उपयोगी विकल्प के तौर पर सामने आए हैं। इन पंखों में बैटरी लगी होती है, जिसकी मदद से बिजली कटने के बाद भी पंखा चलता रहता है। कई बैटरी फैन मॉडल में 8 से 10 घंटे तक बैकअप का दावा किया जाता है। साथ ही इनमें BLDC मोटर का इस्तेमाल होने के कारण सामान्य पंखों की तुलना में बिजली की खपत भी कम हो सकती है।
कैसे काम करता है बैटरी वाला पंखा
इन-बिल्ट बैटरी वाले पंखों में आमतौर पर BLDC यानी Brushless Direct Current मोटर, बैटरी पैक और स्मार्ट चार्जिंग सर्किट दिया जाता है। बिजली मौजूद रहने के दौरान पंखा सामान्य तरीके से चलता है और साथ ही उसकी बैटरी चार्ज होती रहती है। जैसे ही बिजली चली जाती है, सिस्टम अपने आप बैटरी मोड पर स्विच हो जाता है। इससे पंखे को अलग से इनवर्टर से जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। बैटरी की क्षमता और पंखे की स्पीड के आधार पर बैकअप अलग-अलग हो सकता है। कुछ मॉडल 8 से 10 घंटे तक चलने का दावा करते हैं।
सामान्य पंखे से कितनी कम बिजली खाता है
बैटरी वाले पंखों की एक बड़ी खासियत उनकी कम बिजली खपत है। सामान्य सीलिंग फैन में इस्तेमाल होने वाली मोटर की तुलना में BLDC मोटर अधिक ऊर्जा-कुशल होती है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक सामान्य पंखा करीब 70-80 वॉट बिजली ले सकता है, जबकि BLDC तकनीक वाला पंखा लगभग 28-32 वॉट में चल सकता है। वास्तविक खपत पंखे के मॉडल, स्पीड और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है। यानी लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर कम पावर खपत का असर बिजली के बिल पर भी दिखाई दे सकता है।
इनवर्टर होने पर भी मिल सकता है फायदा
अगर घर में पहले से इनवर्टर लगा है, तब भी बैटरी वाला पंखा उपयोगी हो सकता है। बिजली कटने पर पंखा पहले इनवर्टर की सप्लाई पर चल सकता है और लंबे पावर कट के दौरान इनवर्टर बंद होने के बाद इसकी अपनी बैटरी बैकअप दे सकती है। इस तरह पंखे के लिए उपलब्ध बैकअप बढ़ सकता है। हालांकि यह इनवर्टर की क्षमता, लोड और पंखे के मॉडल पर निर्भर करेगा।
वोल्टेज उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षा
कुछ बैटरी वाले BLDC पंखों को व्यापक वोल्टेज रेंज में काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार, कुछ मॉडल 120V से 280V तक की रेंज में काम कर सकते हैं। हालांकि, हर मॉडल की वोल्टेज रेंज अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले निर्माता द्वारा दी गई स्पेसिफिकेशन जरूर देखनी चाहिए।
लिथियम बैटरी और BMS की भूमिका
इन पंखों में आमतौर पर लिथियम बैटरी पैक के साथ BMS यानी Battery Management System दिया जाता है। BMS बैटरी की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग को नियंत्रित करने में मदद करता है। कुछ मॉडल में 500 से ज्यादा चार्जिंग साइकल के बाद भी बैटरी की करीब 80 फीसदी क्षमता बनाए रखने का दावा किया जाता है। हालांकि बैटरी की वास्तविक लाइफ इस्तेमाल, तापमान, चार्जिंग पैटर्न और मॉडल पर निर्भर करती है।
इनवर्टर पर चलने वाले पंखे की आवाज से भी राहत
BLDC मोटर का एक और फायदा इसका अपेक्षाकृत शांत संचालन है। सामान्य AC मोटर वाले पंखे जब इनवर्टर की सप्लाई पर चलते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में हमिंग या आवाज सुनाई दे सकती है। BLDC पंखों में ऐसी समस्या अपेक्षाकृत कम हो सकती है और ये स्मूद तरीके से काम करते हैं। हालांकि शोर का स्तर पंखे के डिजाइन और मोटर की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
अगर आपके इलाके में बिजली कटौती ज्यादा होती है और आप हर पंखे के लिए अलग इनवर्टर बैकअप नहीं चाहते, तो इन-बिल्ट बैटरी वाला पंखा एक विकल्प हो सकता है। वहीं कम बिजली खपत के कारण इसे ऊर्जा बचत के लिहाज से भी देखा जा सकता है।
