रायपुर में ‘आजादी की धुन’ से गूंजा देशभक्ति का सुर

रायपुर में ‘आजादी की धुन’ से गूंजा देशभक्ति का सुर

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी रायपुर में देशभक्ति का अनोखा रंग देखने को मिला। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित ‘आजादी की धुन’ कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए 100 युवा कलाकारों ने एक साथ लाइव बैंड प्रस्तुति दी। अलग-अलग वाद्ययंत्रों से निकली देशभक्ति की धुनों ने पूरे माहौल को राष्ट्रप्रेम से भर दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल हुए। उन्होंने युवा कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।

100 कलाकारों की एक साथ प्रस्तुति बनी खास आकर्षण

‘आजादी की धुन’ समारोह में 100 युवा कलाकारों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ देशभक्ति गीतों की लाइव प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ में इस तरह एक साथ बड़ी संख्या में युवा कलाकारों की प्रस्तुति को मुख्यमंत्री ने अनूठी पहल बताया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संगीत लोगों की भावनाओं को जोड़ने और उन्हें एक सूत्र में बांधने की शक्ति रखता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी गीतों, कविताओं और नारों ने लोगों में आजादी की भावना जगाने और सेनानियों का मनोबल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया याद

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को आजादी असंख्य बलिदानों और संघर्षों के बाद मिली है। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अनेक राष्ट्रनायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान ने स्वतंत्र भारत की नींव मजबूत की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का उत्सव नहीं है, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प भी है। लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों का भी किया स्मरण

मुख्यमंत्री साय ने स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान का उल्लेख करते हुए वीर नारायण सिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान सेनानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि वीर नारायण सिंह ने गरीबों और जरूरतमंदों के अधिकारों के लिए ब्रिटिश शासन का विरोध किया, जबकि बस्तर के जननायक गुण्डाधुर ने भूमकाल आंदोलन के माध्यम से आदिवासी समाज की आवाज को मजबूत किया। इन सेनानियों का संघर्ष छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत का हिस्सा है।

युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आजादी की धुन’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और देश के इतिहास से जोड़ने का काम करते हैं। नई पीढ़ी को यह समझना जरूरी है कि आजादी के पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का त्याग और संघर्ष रहा है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का इस्तेमाल विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने का आह्वान किया।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प रखा है। उन्होंने इसे केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के हर गांव, परिवार और व्यक्ति तक पहुंचे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों और युवाओं को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम बधाई दी। समारोह में जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी रही।

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