छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न एक अलग संदेश लेकर आएगा। बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के उन दुर्गम गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी है, जहां लंबे समय तक माओवादी प्रभाव और हिंसा के कारण राष्ट्रध्वज फहराना संभव नहीं हो सका था। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 2 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित माओवादी भी तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे। सरकार इसे हिंसा से लोकतांत्रिक मुख्यधारा की ओर बढ़ते बस्तर की तस्वीर के तौर पर देख रही है।
92 गांवों में पहली बार फहरेगा राष्ट्रध्वज
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार, इस वर्ष बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांवों में पहली बार राष्ट्रध्वज फहराया जाएगा। इस तरह तीनों जिलों के कुल 92 गांव इस अभियान का हिस्सा होंगे। इनमें ऐसे इलाके भी शामिल हैं, जिन्हें लंबे समय तक माओवादी प्रभाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में देखा जाता रहा है। पूवर्ती, सिलगेर और दरभा जैसे क्षेत्रों में तिरंगा फहराने की तैयारी को बस्तर में बदलते हालात के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के मुताबिक, कभी माओवादी हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले ये क्षेत्र अब विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
2 हजार से ज्यादा पूर्व माओवादी थामेंगे तिरंगा
तिरंगा यात्रा में 2 हजार से अधिक आत्मसमर्पित माओवादियों की भागीदारी इस अभियान का सबसे अहम पहलू होगी। हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने वाले ये लोग अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन पूर्व माओवादियों का राष्ट्रध्वज के साथ यात्रा में शामिल होना बस्तर में हो रहे बदलाव का प्रतीक है। यह हिंसा से लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ने की तस्वीर भी सामने रखता है।

11 से 15 अगस्त तक होंगे विभिन्न कार्यक्रम
बस्तर संभाग में 11 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें तिरंगा यात्राएं, बाइक रैलियां और विभिन्न सामाजिक गतिविधियां शामिल होंगी। भाजपा कार्यकर्ता और भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य माओवादी उन्मूलन अभियान के दौरान बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों से भी मुलाकात कर रहे हैं। इस दौरान उनके घर पहुंचकर तिरंगा भेंट कर सम्मान किया जा रहा है।
500 से ज्यादा स्थानों का शहीदों के नाम पर होगा नामकरण
15 अगस्त को बस्तर संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, प्रमुख चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों और अमर बलिदानियों के नाम पर किए जाने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को बस्तर में शांति और सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों के योगदान से परिचित कराना है।
10 अगस्त को रायपुर से शुरू होगा तिरंगा अभियान
प्रदेश में तिरंगा यात्रा का औपचारिक शुभारंभ 10 अगस्त को रायपुर के मरीन ड्राइव से सुबह 10 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, मंत्री, जनप्रतिनिधि, छात्र, एनसीसी कैडेट्स, पूर्व सैनिक, खिलाड़ी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग शामिल होंगे। बताया गया है कि प्रदेश की 450 से अधिक भाजपा मंडल इकाइयों के साथ ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और विकासखंड मुख्यालयों में भी तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अभियान को राष्ट्र निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर वर्ष 2022 से शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान युवाओं को राष्ट्रभक्ति से जोड़ने और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने का प्रयास है।
सोशल मीडिया पर चलेगा ‘डिजिटल तिरंगा’ अभियान
तिरंगा यात्रा के साथ सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल तिरंगा’ अभियान भी चलाया जाएगा। लोगों से अपने घरों और संस्थानों में तिरंगा फहराने तथा उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की जाएगी। बस्तर के दुर्गम इलाकों में पहली बार राष्ट्रध्वज फहराने और आत्मसमर्पित माओवादियों की भागीदारी के चलते इस वर्ष का अभियान केवल स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे क्षेत्र में बदलते सामाजिक और सुरक्षा परिदृश्य के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
