संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की उच्च स्तरीय सामान्य चर्चा के पहले दिन ही कश्मीर और अमेरिका-क्यूबा संबंधों को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा में आ गईं। 22 सितंबर से शुरू हुई सामान्य बहस 26 सितंबर तक चलेगी और 28 सितंबर को भी इसका एक दिन निर्धारित है।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने अपने संबोधन में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय विवादों का जिक्र करते हुए कश्मीर मुद्दे पर भी टिप्पणी की। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क्यूबा को लेकर तीखे बयान के बाद क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने महासभा हॉल से वॉकआउट किया।
कश्मीर पर एर्दोआन ने क्या कहा
एर्दोआन ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए कश्मीर समेत क्षेत्रीय विवादों का समाधान संवाद के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इन मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के माध्यम से सुलझाने की बात कही।
कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर एर्दोआन का यह रुख नया नहीं है। वह पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर पर अपनी स्थिति रख चुके हैं।
ट्रंप ने क्यूबा को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने UNGA भाषण में क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने क्यूबा को “failed state” बताते हुए कहा कि उनका प्रशासन वहां स्थिति में “मौलिक बदलाव” चाहता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि क्यूबा की सरकार पर पहले से ज्यादा दबाव है और उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में बदलाव आएगा।
ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रुबियो क्यूबा के साथ बातचीत में शामिल हैं और वार्ता की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
ट्रंप के बयान के दौरान क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट
ट्रंप के क्यूबा संबंधी बयान के दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने महासभा हॉल से बाहर निकलकर विरोध दर्ज कराया। यह घटनाक्रम अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच सामने आया है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अमेरिका क्यूबा की धरती से अपनी सुरक्षा के लिए किसी विदेशी खतरे की अनुमति नहीं देगा। दूसरी ओर, क्यूबा की ओर से अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की बात कही गई है।
UNGA में आगे भी कई अहम बैठकें
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 81वें महासभा सत्र की हाई-लेवल वीक में जलवायु कार्रवाई, विकास का अधिकार, समुद्र के बढ़ते जलस्तर और महामारी की तैयारी जैसे मुद्दों पर भी उच्च स्तरीय बैठकें निर्धारित हैं।
