कई संकटग्रस्त प्रजातियों का होगा संरक्षण
उत्तर प्रदेश वन विभाग ने गंगा नदी के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी में एक विशेष कछुआ पुनर्वास कार्यक्रम (Varanasi Turtle Rehabilitation) को नई गति दी है। इस पहल के तहत आगरा के चंबल क्षेत्र से 3,000 से अधिक दुर्लभ कछुओं के अंडे लाकर आधुनिक हैचिंग तकनीक से उनके बच्चों को तैयार किया जा रहा है। इन कछुओं को बड़ा होने के बाद गंगा नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी की प्राकृतिक सफाई और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
चंबल से वाराणसी तक पहुंचाए गए हजारों अंडे
वन विभाग की टीम चंबल और इटावा क्षेत्र से दुर्लभ कछुओं के अंडों को सावधानीपूर्वक एकत्र करती है। इन अंडों को तापमान नियंत्रित विशेष बॉक्स में सुरक्षित रखते हुए वाराणसी स्थित कछुआ पुनर्वास केंद्र लाया जाता है।
यहां आधुनिक हैचिंग मशीन और कृत्रिम रेत के घोंसलों में अंडों को सुरक्षित रखा जाता है, जहां कुछ सप्ताह बाद स्वस्थ कछुओं के बच्चे निकलते हैं।
विलुप्त होती प्रजातियों का संरक्षण
वाराणसी स्थित कछुआ पुनर्वास केंद्र में एक समय में करीब 2,000 से 3,000 कछुओं के संरक्षण और पालन-पोषण की क्षमता है।
यहां जिन प्रमुख प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं—
- रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल (Red-Crowned Roofed Turtle)
- सुंदरी कछुआ
- पचेरिया
- ढोर कछुआ
- कटावा
- भूत कछुआ
- भारतीय टेंट कछुआ
विशेषज्ञों के अनुसार इनमें कई प्रजातियां दुर्लभ और संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
गंगा की सफाई में निभाते हैं अहम भूमिका
कछुए गंगा नदी के प्राकृतिक सफाईकर्मी माने जाते हैं। मांसाहारी और सर्वाहारी प्रजाति के कछुए नदी में मौजूद जैविक अवशेष, मृत जीवों के अवशेष तथा अन्य सड़ने-गलने वाली सामग्री को खाकर जल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करते हैं।
जब पुनर्वास केंद्र में तैयार किए गए कछुए पर्याप्त बड़े और आत्मनिर्भर हो जाते हैं, तब उन्हें वाराणसी के कछुआ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में गंगा नदी के भीतर छोड़ा जाता है।
पर्यावरण संरक्षण का सफल मॉडल
वन विभाग का मानना है कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और प्राकृतिक संरक्षण उपायों के समन्वय से गंगा की जैव विविधता को मजबूत किया जा सकता है। यह परियोजना न केवल संकटग्रस्त कछुओं की संख्या बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

