दुनिया में अब तक सात महाद्वीपों के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन भू-विज्ञान की दुनिया में एक ऐसे विशाल भूभाग की पहचान हुई है, जिसे दुनिया का आठवां महाद्वीप जीलैंडिया (Zealandia) कहा जाता है। इसका करीब 94 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे है, जबकि न्यूजीलैंड और न्यू कैलेडोनिया इसके पानी से बाहर दिखाई देने वाले प्रमुख हिस्से हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक जीलैंडिया का क्षेत्रफल करीब 49 लाख वर्ग किलोमीटर है। आकार के लिहाज से यह भारत के क्षेत्रफल से करीब दोगुना है।
समुद्र के नीचे कहां है जीलैंडिया
जीलैंडिया न्यूजीलैंड के आसपास दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में फैला हुआ है। न्यूजीलैंड, न्यू कैलेडोनिया और कुछ छोटे द्वीप इस विशाल भूभाग के समुद्र से ऊपर दिखाई देने वाले हिस्से माने जाते हैं। इस महाद्वीप का नाम जियोफिजिसिस्ट ब्रूस लुयेंडिक ने 1995 में प्रस्तावित किया था। इसके बाद 2017 में भू-वैज्ञानिक निक मोर्टिमर और उनके सहयोगियों ने इसके महाद्वीपीय स्वरूप के समर्थन में विस्तृत भूवैज्ञानिक प्रमाण पेश किए।
जीलैंडिया का 94 फीसदी हिस्सा पानी में डूबा
जीलैंडिया की सबसे खास बात यह है कि इसका लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे है। इसलिए सामान्य नक्शों में यह एक अलग महाद्वीप के तौर पर दिखाई नहीं देता। हालांकि वैज्ञानिकों के लिए किसी भूभाग को महाद्वीप मानने का आधार केवल समुद्र से ऊपर दिखाई देने वाली जमीन नहीं है। इसकी चट्टानों, क्रस्ट की संरचना, मोटाई और भूवैज्ञानिक निरंतरता जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।
समुद्री क्रस्ट से अलग है जीलैंडिया की क्रस्ट
वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्य समुद्री क्रस्ट अपेक्षाकृत घनी और पतली होती है, जिसकी मोटाई आमतौर पर करीब 7 किलोमीटर होती है। इसके मुकाबले जीलैंडिया के नीचे महाद्वीपीय क्रस्ट काफी मोटी है। भूकंपीय अध्ययनों के मुताबिक जीलैंडिया के कई हिस्सों में क्रस्ट की मोटाई करीब 10 से 30 किलोमीटर तक है। न्यूजीलैंड के साउथ आइलैंड के नीचे कुछ स्थानों पर इसकी मोटाई 40 किलोमीटर से भी अधिक बताई गई है।
8.5 करोड़ साल पहले तक समुद्र से ऊपर था
जीलैंडिया हमेशा समुद्र में डूबा हुआ नहीं था। भूवैज्ञानिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि करीब 8.5 करोड़ साल पहले इसका बड़ा हिस्सा समुद्र के ऊपर मौजूद था। लगभग 10 करोड़ से 8.5 करोड़ साल पहले इस क्षेत्र में भूगर्भीय बदलावों के कारण इसकी महाद्वीपीय क्रस्ट खिंचकर पतली होने लगी। इसके बाद समुद्र तल के फैलाव और टेक्टोनिक गतिविधियों ने इस भूभाग के स्वरूप को बदल दिया। समय के साथ जीलैंडिया का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे चला गया और आज इसका केवल छोटा हिस्सा ही द्वीपों के रूप में पानी से ऊपर दिखाई देता है।
क्या वैज्ञानिकों ने नया महाद्वीप खोजा है
यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि वैज्ञानिकों ने 2017 में किसी अज्ञात जमीन की खोज की थी। समुद्र के नीचे मौजूद पर्वत श्रृंखलाओं, पठारों और अन्य भूगर्भीय संरचनाओं की जानकारी पहले से थी। असल बदलाव इसे अलग-अलग समुद्री भूभागों के बजाय एक एकीकृत महाद्वीपीय भूभाग के रूप में समझने में आया। इसी आधार पर जीलैंडिया को दुनिया के आठवें महाद्वीप के रूप में पहचान दिलाने की वैज्ञानिक कोशिश हुई।
