लेखक: चन्द्र शेखर गंगराड़े, पूर्व प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ विधानसभा (लेखक इनदिनों अमेरिका प्रवास पर हैं।)
अमेरिका ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मुक्ति पाने के लिए हुए लंबे संघर्ष के बाद 4 जुलाई 1776 को अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। हालाँकि 3 सितंबर 1783 में पेरिस समझौते के तहत अमेरिका पूर्ण रूप से स्वतंत्र हुआ और स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व में आया लेकिन अमेरिका में 4 जुलाई को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप मे मनाया जाता है. इस प्रकार 4 जुलाई 2026 को अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा के 250 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
आर्थिक एवं सामरिक दृष्टि से अमेरिका विश्व के सबसे संपन्न और शक्तिशाली देशों में से एक है। कुल क्षेत्रफल के हिसाब से अमेरिका विश्व का तीसरा और भूमि क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है तथा जनसंख्या की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा देश है। विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 4.3 प्रतिशत भाग अमेरिका में निवास करता है, जबकि वैश्विक संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका के पास है। यही कारण है कि वहाँ की प्रति व्यक्ति आय विश्व में सबसे अधिक आय वाले देशों में गिनी जाती है।
अमेरिका का नाम इतालवी नाविक Amerigo Vespucci के नाम पर रखा गया है।
अमेरिका के महाशक्ति बनने के पीछे केवल विशाल भू-भाग और अपेक्षाकृत कम जनसंख्या ही कारण नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, नागरिक चेतना (Civic Sense), कानूनों के प्रति सम्मान और मजबूत संस्थागत व्यवस्था ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी अनुकूल भौगोलिक स्थिति तथा प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्धों से अपेक्षाकृत कम प्रत्यक्ष नुकसान होने के कारण भी इसे लाभ मिला। युद्धरत देशों को हथियार एवं अन्य सामग्री उपलब्ध कराकर अमेरिका ने अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1944 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते ने अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में प्रमुख स्थान दिलाया। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्त में डॉलर का प्रभुत्व स्थापित हुआ, जिससे अमेरिका की आर्थिक शक्ति और अधिक सुदृढ़ हुई।
क्षेत्रफल की दृष्टि से अमेरिका का क्षेत्रफल भारत से तीन गुना अधिक है लेकिन जनसंख्या की दृष्टि से भारत की जनसंख्या अमेरिका की तुलना में लगभग पाँच गुना अधिक है। इसलिये दोनों देशों के बीच विकास की दृष्टि से तुलना संभव नहीं है। हालांकि आर्थिक दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार भारत इस समय छट्टी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। फिर भी मेरा यह मानना है कि यदि भारत के लोग भी नागरिक चेतना के (Civic Sense) प्रति सजग रहे और स्व अनुशासन तथा क़ानून का पालन करें तो भारत भी अन्य विकसित देशों के समकक्ष खड़ा हो सकता है और इसके लिए हमें समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देना होगा।
