अविश्वास प्रस्ताव पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है सरकार

अविश्वास प्रस्ताव पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला। करीब एक घंटे के भाषण में उन्होंने दावा किया कि सरकार ढाई वर्षों में हर क्षेत्र में विफल रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि शासन किसी “अदृश्य शक्ति” के इशारे पर चल रहा है।

RSS, इटली और मुसोलिनी का किया जिक्र

भूपेश बघेल ने अपने भाषण की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर की पूर्व टिप्पणी का जवाब देते हुए की। बिना किसी राष्ट्रीय नेता का नाम लिए उन्होंने कहा कि भाजपा जिन लोगों की शुचिता की बात करती है, उन्हें अपने वैचारिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने डॉ. बी.एस. मुंजे, इटली और मुसोलिनी का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर सवाल उठाए।

इस दौरान अजय चंद्राकर ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मुंजे का आरएसएस से क्या संबंध था। इस पर बघेल ने जवाब दिया कि जब जरूरत होती है तब लोगों को अपना बताया जाता है और बाद में उनसे दूरी बना ली जाती है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने से पहले ही कोई अदृश्य शक्ति फैसले लेने लगी थी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार किसके इशारे पर संचालित हो रही है।

भाजपा विधायक सुनील सोनी ने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख किया, जिस पर बघेल ने कहा कि जब मनमोहन सिंह बोलते थे तो पूरी दुनिया उन्हें सुनती थी।

धान खरीदी और खाद संकट पर सरकार को घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनके अनुसार कई स्थानों पर धान खुले में पड़ा है, भीग रहा है और संग्रहण केंद्रों से समय पर उठाव नहीं हो रहा।

उन्होंने खाद संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसान डीएपी और यूरिया के लिए परेशान हैं और बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले कृत्रिम कमी पैदा करती है और फिर ऊंचे दामों पर खाद उपलब्ध कराती है।

इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और विपक्ष किसानों को भ्रमित कर रहा है। इसके जवाब में बघेल ने उर्वरकों के अनुपात और किसानों की जरूरतों पर सवाल उठाए।

राशन, पेंशन और बजट पर भी सवाल

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि केवाईसी प्रक्रिया के कारण लाखों लोगों को राशन मिलने में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान कोरोना काल में भी लोगों तक समय पर राशन पहुंचाया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बार अनुपूरक बजट (सप्लीमेंट्री बजट) नहीं लाई, जिससे यह संकेत मिलता है कि या तो राज्य के पास धन की कमी है या केंद्र से पर्याप्त राशि नहीं मिल रही। उन्होंने विधवा पेंशन और स्थानीय निकायों में वेतन भुगतान में देरी का भी मुद्दा उठाया।

इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले से बेहतर वित्तीय प्रबंधन कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर ही अनुपूरक बजट लाया जाता है।

कानून व्यवस्था और महादेव ऐप का भी उठाया मुद्दा

भूपेश बघेल ने कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सीतापुर, बलौदाबाजार, अवैध रेत उत्खनन और अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

उन्होंने महादेव ऐप मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए।

पेसा कानून, जंगल और आदिवासी मुद्दों पर भी बोले

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने का काम कांग्रेस सरकार ने किया था। उन्होंने तमनार और हसदेव क्षेत्र में जंगल कटाई तथा खनन गतिविधियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में लोगों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद पर मिली सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और इसका श्रेय केवल वर्तमान सरकार को नहीं दिया जा सकता।

स्वास्थ्य व्यवस्था और योजनाओं पर उठाए सवाल

भूपेश बघेल ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े सरकारी अस्पतालों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने दवा खरीदी और स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा पेश किया गया आरोप पत्र सरकार के जनविरोधी निर्णयों का दस्तावेज है और सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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