दीक्षांत समारोह में 688 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया समाज सेवा का संदेश

दीक्षांत समारोह में 688 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया समाज सेवा का संदेश

रायगढ़। रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में शनिवार को शिक्षा, उपलब्धि और प्रेरणा का अनूठा संगम देखने को मिला। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और साइंस संकाय के कुल 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान का उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए करना है।

शिक्षा को समाज सेवा से जोड़ने का संदेश

राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी शिक्षित व्यक्ति की पहचान उसके प्रमाण-पत्रों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके योगदान से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने और समाज को स्थायी लाभ पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसमें विवेक, नैतिकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का समावेश हो। ज्ञान का सर्वोत्तम उपयोग तभी संभव है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

बदलते दौर में युवाओं की भूमिका अहम

राज्यपाल ने कहा कि आज का समय तेजी से बदलती तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का है। ऐसे दौर में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रह सकती। उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे युवा तैयार करने होंगे, जिनमें नेतृत्व क्षमता, अनुसंधान की सोच, नवाचार और सामाजिक सरोकारों की समझ विकसित हो।

उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर नए अवसर पैदा करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

688 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, मेधावियों का सम्मान

दीक्षांत समारोह में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और स्कूल ऑफ साइंस के कुल 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं।

शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विश्वविद्यालय ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया। समारोह में:

  • 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक
  • 28 विद्यार्थियों को रजत पदक
  • 29 विद्यार्थियों को कांस्य पदक

प्रदान किए गए। इस दौरान विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों पर भी दिया जोर

राज्यपाल ने कहा कि केवल तकनीकी दक्षता या डिग्री सफलता की गारंटी नहीं होती। जीवन में ईमानदारी, नैतिक साहस, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने करियर में सफलता के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए भी योगदान दें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ओपी जिंदल विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और अपने उत्कृष्ट कार्यों से विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

समारोह में जिंदल स्टील के चेयरमैन एवं सांसद नवीन जिंदल, विश्वविद्यालय की चांसलर शालू जिंदल, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल, जिंदल स्टील रायगढ़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देबोज्योति रॉय तथा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.डी. पाटीदार सहित अनेक शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विद्यार्थियों के अभिभावक उपस्थित रहे।

समारोह का समापन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ।

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