ग्राहक की डांट ने बदल दी जिंदगी: चीन के डिलीवरी बॉय को मिला देश का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान

ग्राहक की डांट ने बदल दी जिंदगी: चीन के डिलीवरी बॉय को मिला देश का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान

खाना पहुंचाते-पहुंचाते लिखीं कविताएं, अब मिला चीन का प्रतिष्ठित ‘लू शुन साहित्य पुरस्कार’

बीजिंग। कहते हैं कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। चीन के 56 वर्षीय फूड डिलीवरी राइडर वांग जिबिंग ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कभी गलियों में खाना पहुंचाने वाले वांग को अब देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक ‘लू शुन साहित्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। उनकी कविता संग्रह ‘लो अल्टीट्यूड फ्लाइट’ (Low Altitude Flight) को यह सम्मान मिला है।

वांग की कहानी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने डिलीवरी के दौरान मिलने वाले छोटे-छोटे खाली समय में कागज के टुकड़ों, नोटबुक और यहां तक कि अपनी हथेली पर भी कविता की पंक्तियां लिखीं। यही शौक उन्हें चीन के साहित्य जगत की ऊंचाइयों तक ले गया।

ग्राहक की डांट से शुरू हुआ साहित्य का सफर

वांग जिबिंग की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ वर्ष 2019 में आया। उस समय वे चीन के जियांगसू प्रांत के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे।

एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर तक पहुंचने के लिए वांग को कई इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वे आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया।

उस घटना से आहत वांग ने घर लौटते समय अपनी भावनाओं को कविता में ढाल दिया। इसी घटना से उनकी चर्चित कविता “मैन इन ए हरी” (Man in a Hurry) का जन्म हुआ। कविता सोशल मीडिया पर वायरल हुई और यहीं से उनके लेखक बनने का सफर शुरू हुआ।

14 साल की उम्र में छोड़नी पड़ी पढ़ाई

वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें केवल 14 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

जीवनयापन के लिए उन्होंने कई छोटे-बड़े काम किए—

  • निर्माण मजदूर
  • कबाड़ बीनने का काम
  • सड़क किनारे सामान बेचना
  • फूड डिलीवरी राइडर

इन सबके बीच उन्होंने पढ़ने और लिखने का अपना शौक कभी नहीं छोड़ा।

डिलीवरी राइडर्स की जिंदगी पर लिखी किताब

वर्ष 2024 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘लो अल्टीट्यूड फ्लाइट’ में फूड डिलीवरी कर्मियों के संघर्ष, मेहनत, सामाजिक दबाव और रोजमर्रा की जिंदगी को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इस पुस्तक को लिखने से पहले वांग ने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में जगह दी।

उनकी चर्चित कविता की एक पंक्ति है—

“किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।”

अब तक लिख चुके हैं 6 हजार से ज्यादा कविताएं

वांग जिबिंग अब तक 6,000 से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं चीन की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।

उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि लोग डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी और संघर्ष को समझें तथा उनके प्रति सम्मान और धैर्य का व्यवहार करें।

उनकी एक और प्रसिद्ध पंक्ति है—

“सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है।”

पुरस्कार मिलने के बाद भी नहीं छोड़ेंगे नौकरी

इतना बड़ा सम्मान मिलने के बावजूद वांग ने साफ कहा है कि वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि अब भले ही उन्हें आर्थिक जरूरत न हो, लेकिन फूड डिलीवरी का काम उन्हें जमीन से जोड़े रखता है। उनका कहना है कि वे 60 वर्ष की उम्र तक डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं।

वांग के अनुसार,

“यह काम मुझे सक्रिय और फिट रखता है। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं। यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा।”

चीन में बढ़ रही है श्रमिक लेखकों की पहचान

पिछले कुछ वर्षों में चीन में मजदूर, डिलीवरी कर्मी और प्रवासी श्रमिकों की लिखी किताबों और आत्मकथाओं को काफी सराहना मिली है।

पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग भी बेस्टसेलर रही। वहीं, प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख आई एम फान यूसु पूरे चीन में चर्चा का विषय बना था।

क्या है लू शुन साहित्य पुरस्कार?

लू शुन साहित्य पुरस्कार चीन का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक है। इसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। यह पुरस्कार चाइना राइटर्स एसोसिएशन द्वारा हर चार वर्ष में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों को दिया जाता है और इसे चीन के साहित्य जगत का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।

वांग जिबिंग की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि जुनून और मेहनत साथ हो तो एक साधारण डिलीवरी राइडर भी देश का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान हासिल कर सकता है।

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