हाईकोर्ट ने रद्द किया पिछला वेतन आदेश

हाईकोर्ट ने रद्द किया पिछला वेतन आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक्सीक्यूटिंग कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मामले की मूल डिक्री या फैसले में जिस राहत का स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया है, उसे लागू कराने वाली अदालत अपने स्तर पर नहीं दे सकती। यानी एक्सीक्यूटिंग कोर्ट मूल निर्णय की सीमा से बाहर जाकर नया राहत आदेश जारी नहीं कर सकती। यह मामला CISF कमांडेंट की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ में हुई।

क्या है पूरा मामला

CISF में कांस्टेबल रहे रामकरण शर्मा को 2 मार्च 1983 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बर्खास्तगी के खिलाफ सिविल कोर्ट में मामला दायर किया। निचली अदालत के फैसले के बाद मामला प्रथम अपील और फिर हाईकोर्ट तक पहुंचा।

हाईकोर्ट ने मामले में बर्खास्तगी की सजा को संशोधित करते हुए रामकरण शर्मा को वेतनमान के न्यूनतम स्तर पर रखने का आदेश दिया था। हालांकि, इस फैसले में बर्खास्तगी की अवधि का पिछला वेतन (Back Wages) देने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं था।

एक्सीक्यूटिंग कोर्ट ने दिया था पिछला वेतन देने का आदेश

मामला जब फैसले के पालन के लिए एक्सीक्यूटिंग कोर्ट के सामने पहुंचा, तो 12 जनवरी 2024 को अदालत ने रामकरण शर्मा को बर्खास्तगी की तारीख से सेवानिवृत्ति तक का पिछला वेतन देने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को CISF कमांडेंट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि मूल फैसले में जब पिछला वेतन देने का कोई निर्देश नहीं था, तो एक्सीक्यूटिंग कोर्ट को अपनी ओर से ऐसी राहत देने का अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद माना कि मूल फैसले में सजा संशोधित किए जाने से रामकरण शर्मा को वेतन संबंधी लाभ मिल सकते थे, लेकिन अदालत ने कहीं भी बर्खास्तगी की अवधि के लिए पिछला वेतन देने का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था। ऐसे में एक्सीक्यूटिंग कोर्ट द्वारा मूल डिक्री से आगे बढ़कर Back Wages देने का आदेश जारी करना उचित नहीं था। हाईकोर्ट ने एक्सीक्यूटिंग कोर्ट के 12 जनवरी 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया।

डिक्री की सीमा से बाहर नहीं जा सकती एक्सीक्यूटिंग कोर्ट

हाईकोर्ट ने इस फैसले के जरिए यह स्पष्ट किया कि एक्सीक्यूटिंग कोर्ट का काम मूल फैसले या डिक्री को लागू करना है, उसमें नई राहत जोड़ना नहीं। यदि किसी राहत का आदेश मूल निर्णय में नहीं है, तो उसके आधार पर एक्सीक्यूटिंग कोर्ट अलग से लाभ देने का निर्देश नहीं दे सकती। इस आधार पर हाईकोर्ट ने CISF की याचिका स्वीकार करते हुए एक्सीक्यूटिंग कोर्ट का पिछला वेतन देने संबंधी आदेश रद्द कर दिया।

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