जिले में हुई तेज बारिश ने नगर पालिक निगम के ड्रेनेज सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और कई घरों तक पानी पहुंच गया। कुछ स्थानों पर तीन फीट से ज्यादा पानी भरने की जानकारी सामने आई है। दादर नाले के छोटे पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि सर्वमंगला-कनबेरी मार्ग पर मलबा गिरने से एक कार दब गई। लोगों का कहना है कि यदि अधूरी ड्रेनेज और जल निकासी से जुड़ी योजनाओं को समय पर पूरा किया जाता, तो बारिश के दौरान पैदा हुई परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
मलबे में दबी कार, पांच लोग थे सवार
सर्वमंगला-कनबेरी मार्ग पर पुनर्वास ग्राम जटराज के पास ओवरबर्डन का मलबा सड़क पर आ गिरा। इसकी चपेट में एक कार आ गई, जिसमें पांच लोग सवार थे। गनीमत रही कि सभी लोग सुरक्षित बच गए। घटना के बाद यहां रिटर्निंग वॉल बनाने की बात सामने आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे पूरा होने में अभी समय लगने की संभावना है।
पोड़ीबहार और रविशंकर नगर में घरों तक पहुंचा पानी
निहारिका क्षेत्र के पॉश इलाकों में भी भारी बारिश का असर दिखाई दिया। सुभाष चौक से पोड़ीबहार जाने वाले मार्ग पर तीन फीट से ज्यादा पानी जमा होने की स्थिति बनी। जलभराव के कारण बच्चों के पानी में तैरने के वीडियो भी सामने आए। स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास के नालों की क्षमता अत्यधिक बारिश का पानी निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है। नए निर्माण और संकरे रास्तों के कारण भी जल निकासी प्रभावित होने की बात कही जा रही है। रविशंकर नगर और महाराणा प्रताप नगर में भी कई घरों में पानी घुस गया। बारिश रुकने के बाद लोग खुद घरों से पानी बाहर निकालते नजर आए।
दादर का पुराना पुल बना परेशानी की वजह
कोरबा शहर को दादर क्षेत्र से जोड़ने वाला पुराना पुल भी तेज बारिश के दौरान लोगों के लिए मुसीबत बन गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुल सड़क के स्तर से काफी नीचे है और इसके नीचे से गुजरने वाला नाला भी संकरा है। बारिश बढ़ने पर नाले का पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है। स्थानीय निवासी नीलाभ के अनुसार तेज बारिश के दौरान यहां एक स्कॉर्पियो भी पानी में डूब गई। उनका कहना है कि पुल काफी पुराना और नीचा होने के कारण हर बार बारिश में खतरा पैदा होता है। पानी बढ़ने पर सड़क बंद हो जाती है और आवागमन प्रभावित होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां नया पुल बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन प्रस्तावित काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
मानिकपुर में कई इलाकों का पानी एक ही नाले पर निर्भर
मानिकपुर क्षेत्र में भी भारी जलभराव की स्थिति बनी। पार्षद नारायण लाल कुर्रे ने इस संबंध में कलेक्टर से शिकायत की है। उनके मुताबिक सागौन बाड़ी और डिपरापारा सहित कई क्षेत्र पानी से प्रभावित हुए। मानिकपुर का प्रमुख नाला आसपास के करीब 10 वार्डों से आने वाले पानी की निकासी करता है। इंडस्ट्रियल एरिया, झगरहा, कोसाबाड़ी, राजेंद्र प्रसाद नगर, महाराणा प्रताप नगर और शिवाजी नगर सहित कई क्षेत्रों का पानी इसी नाले से होकर हसदेव नदी की ओर जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की क्षमता बढ़ाने और उसकी चौड़ाई बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि हर साल बारिश के दौरान यहां जलभराव की समस्या सामने आती है।

सीतामणी में ऐतिहासिक मंदिर परिसर तक पहुंचा पानी
सीतामणी इलाके में स्थित ऐतिहासिक सीता गुफा मंदिर भी जलभराव से प्रभावित हुआ। यहां करीब 100 से ज्यादा घरों में पानी भरने की बात सामने आई है। स्थानीय निवासी दुकालू श्रीवास ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले बड़े नाले में शहर के कई हिस्सों का पानी आता है। उनका दावा है कि नाले के निर्माण के समय ही इसकी क्षमता और गहराई को लेकर अधिकारियों को जानकारी दी गई थी। उनके मुताबिक नाले की मूल गहराई करीब पांच फीट थी, लेकिन बाद में इसकी गहराई कम होने से पानी की निकासी प्रभावित हुई। उनका कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसका असर केवल सीतामणी तक सीमित नहीं है।
पूर्व मंत्री ने निगम की तैयारी पर उठाए सवाल
कोरबा के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने शहर में बने हालात को लेकर नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में मानसून से पहले जर्जर सड़कों की मरम्मत और बड़े नालों की सफाई कराई जाती थी। उन्होंने दावा किया कि 29 अगस्त को शहर में जिस तरह के हालात उन्होंने देखे, ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे। उनके अनुसार कई बड़ी योजनाएं अभी अधूरी हैं और मानसून से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की गई।
महापौर बोलीं- जरूरत के हिसाब से बनेगा प्लान
जलभराव की समस्या पर कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत ने कहा कि इस वर्ष बारिश काफी अधिक हुई है, जिसके कारण कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत का आकलन किया जा रहा है। महापौर के अनुसार शहर के ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए योजना तैयार कर ठोस काम किया जाएगा।
31 अगस्त तक 995.3 मिलीमीटर बारिश
भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोरबा जिले में 1 जून से 31 अगस्त तक औसतन 995.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस दौरान कोरबा तहसील में 1337.9 मिलीमीटर, भैंसमा में 1106.2, करतला में 1097.6, दीपका में 1075.4, दर्री में 1081.9, पाली में 972.3 और कटघोरा में 971.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान औसत 4.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
19 बड़े नाले हैं ड्रेनेज सिस्टम की रीढ़
नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्र में कुल 42 छोटे-बड़े नाले बताए गए हैं। इनमें 19 बड़े नाले शहर की जल निकासी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हसदेव नदी में मिलने वाले 11 प्रदूषित नालों के पानी के उपचार के लिए NTPC के सहयोग से करीब 111 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है। योजना के तहत सेकेंडरी और टर्शरी वाटर ट्रीटमेंट सुविधा विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य गंदे पानी को साफ कर उसे औद्योगिक काम और कूलिंग के लिए दोबारा इस्तेमाल करना है। परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
कोरबा शहर में बड़े नालों की कुल लंबाई करीब 19 किलोमीटर बताई गई है। परिवहन नगर, कोसाबाड़ी, पंडित रविशंकर शुक्ला क्षेत्र, बालको, दर्री, बांकीमोंगरा और सर्वमंगला नगर सहित कई इलाकों में बड़े नाले हैं। नगर निगम के 67 वार्डों में से 43 वार्डों की सफाई व्यवस्था ठेके पर है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। 14 वार्डों में निगम अपने कर्मचारियों के माध्यम से सफाई कराता है, जबकि 10 वार्ड NTPC, SECL और CSEB जैसे औद्योगिक उपक्रमों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में आते हैं। कोरबा नगर निगम का क्षेत्रफल 215.02 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार निगम क्षेत्र की आबादी 3,65,073 थी। शहर में अधिसूचित और अनधिकृत मलिन बस्तियों की संख्या भी काफी अधिक है, जिससे बारिश के दौरान जल निकासी और जलभराव की समस्या का असर ज्यादा दिखाई देता है।
